खाटू श्याम के चमत्कार की कहानी | खाटू श्याम जी की जीवन कथा | शीश के दानी की कथा

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खाटू श्याम जी ( Khatu Shyaam Ji )

बाबा श्याम , हारे का सहारा , लखदातार , खाटू श्याम जी , नील घोड़े का सवार , मोर्विनंदन , खाटू नरेश , शीश का दानी | जितने निराले बाबा श्याम के नाम और भक्त है उतना ही रोचक इनका इतिहास है |

आइये में आपको इनके इतिहास के बारे में बताती हु( खाटू श्याम जी के चमत्कार)

द्वापर के अंतिम चरण में हस्तिनापुर कोरव और पांडव राज करते थे पांड्वो ने वनवास काल में भीम का विवाह हिडिम्बा के साथ करा दिया उसका एक पुत्र हुआ जिसका नाम घटोत्कज़ रखा गया पांड्वो का राज्याभिषेक होने पर घटोत्कज़ का कामकंटककटा के साथ हुआ और उससे बर्बरीक का जन्म हुआ और बर्बरीक को भगवती जगदम्बा से अजेय होने का वरदान प्राप्त था ( खाटू श्याम जी के चमत्कार )

जब महाभारत का युद्ध हुआ तो बर्बरीक ने युद्ध देखने की इच्छा से कुरुक्षेत्र की और चले गये इस दोरान मार्ग में बर्बरीक की मुलाकात भगवान श्री कृष्ण से हुयी श्री कृष्ण ने ब्राह्मण वेश धारण किया था और बर्बरीक के बारे में जानने के लिए श्री कृष्ण ने उन्हें रोका और यह जानकर उनकी हसी उड़ाई की मात्र 3 बाण लेकर युद्धभूमि में युद्ध करने के लिए आ गये

श्री कृष्ण की यह बात सुनकर बर्बरीक ने उतर दिया की उनका केवल एक बाण शत्रु सेना को परास्त करने के लिए काफी है और ऐसा करने के बाद बाण वापस तुणीर में ही आएगा और यदि तीनो बाणों को प्रयोग में ले लिया तो पुरे बरहमांड का विनाश हो जायेगा यह सुनकर भगवान कृष्ण ने उन्हें कहा की इस व्रक्ष के सभी पत्तो को वेधकर दिखाओ और फिर बर्बरीक ने पेड़ के सभी पत्तो को एक ही बाण से बींध दिया तथा श्री कृष्ण के पेरो के निचे के पत्ते को भी बींधकर वो बाण तरकस मं चला गया

श्री कृष्ण ने उनसे पुछा की वे युद्ध में किसकी तरफ से लड़ने आये है तो इस पर बर्बरीक ने उतर दिया की जो पक्ष निर्बल होगा हार रहा होगा में उन्ही की तरफ से युद्ध लडूंगा और श्री कृष्ण जानते थे हार कोरवो की ही होगी और अगर बर्बरीक ने उनका साथ दिया तो परिणाम गलत पक्ष में हो जायेगा ( खाटू श्याम जी के चमत्कार )

बर्बरीक की बात सुनकर श्री कृष्ण ने ब्राह्मण रूप में उनसे शीश दान माँगा और बर्बरीक सोच में पड गये फिर बर्बरीक बोले एक साधारण ब्राह्मण इस तरह का दान नहीं मांग सकता इसलिए उन्होंने ब्राह्मण से अपने वास्तविक रूप में आने की याचना की जिससे श्री कृष्ण अपने वास्तविक रूप में आ गये

उसके बाद श्री कृष्ण ने बर्बरीक को शीश दान का कारण समझाया की युद्ध शुरू होने से पहले युद्धभूमि पूजन के लिए तीनो लोको में सबसे सर्वश्रेष्ठ क्षत्रिय के शीश की आहुति देनी होती है इसलिए उन्हें ऐसा करना पड़ा | बर्बरीक ने श्री कृष्ण से महाभारत का युद्ध देखने की इच्छा प्रकट की और श्री कृष्ण ने उकी ये इच्छा स्वीकार कर ली श्री कृष्ण ने बर्बरीक ने इस बलिदान से खुश होकर युद्ध में सबसे सर्वश्रेष्ठ वीर की उपाधि दी

श्री कृष्ण ने बर्बरीक को एक वरदान दिया था की

तुम कलियुग में मेरे नाम से पूजे जाओगे , तुम्हारे स्मरण मात्र से ही भक्तो का कल्याण होगा मोक्ष की प्राप्ति होगी बर्बरीक का शीश खाटू नगर में दफनाया गया इसलिए इन्हें खाटू श्यान के नाम से जाना जाता है |

location

खाटू श्याम जी का मुख्य मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के गाव खाटू में बना हुआ है | खाटू श्याम मुख्य मंदिर जयपुर से उत्तर दिशा में वाया रिंगस होकर 80 किलोमीटर दूर पड़ता है इस श्याम मंदिर की आधारशिला 1720 में रखी गयी थी |( Khatu Shyaam Ji )

चमत्कार

17 मई 2014 को श्याम कृपा सुबह 5 बजे टहलने के लिए निकले मेरी आदत के अनुसार में श्याम बाबा का भजन गुनगुना रहा था और रात को बारिश हुई और उसी दिन मैंने अपनी पत्नी और बेटे को बीकानेर भेजा। वह लोग मिर्जापुर जा रहे थे। मेरा एक बहुत ही प्यारा भजन है जो मुझे बहुत पसंद है वो है अंगुली पकड़ ले पकड़ता न कोई , तेरे दर पे आँख ये रोई गुनगुनाते हुए हेम खिची के घर से थोड़ा आगे जो सूरतगढ़ रोड के पास है मैं यहाँ पहुँच गया था | (खाटू श्याम जी के चमत्कार)

यहाँ पर मुझे इस भजन का अंतरा नहीं मिल रहा था। मैं दूसरा भजन गुनगुनाना “ मेरा हाथ पकड़ लो बनवारी , नहीं तो डूब जायेंगे” “ हमारा कुछ ना बिगड़ेगा , तुम्हारी लाज जाएगी” शुरू ही किया था और अपना हाथ उठा कर दुबारा बोला ही था अचानक मेरे पीछे से एक ट्रेलर आया फिर हवा का एक तेज झोंका आया और मैं सड़क के किनारे चल रहा था और बायीं और मुझे एक झटके से घुमा दिया मेरा आधा पैर सड़क पर और आधा भाग पानी बाहर था (खाटू श्याम जी के चमत्कार)

, मेरा दिमाग पूरी तरह सुन्न हो गया और मेरा शरीर पत्थर की तरह हो गया, ट्रेलर 5 सेकंड में मेरे पास से निकल गया, जबकि सड़क बिल्कुल खाली थी। बाद में 3-४ सेकंड मैं मुझे होश आया |, मुझे बस इतना ही याद है कि ट्रेलर के पिछले टायर सड़क के आखिरी (साइड) पर चल रहे थे। मैंने इसे सामान्य रूप में लिया और फिर आगे बढ़ गया

जब मैं घर पहुंचा और स्नान किया जब मैंने शर्ट को उतार दिया, मैंने देखा कि मेरी शर्ट के पीछे हलकी सी मिटटी लगी हुयी थी , तो मैं समझ गया कि यह ट्रेलर की बॉडी को छूने के दौरान हुआ होगा (शायद मेरी शर्ट खुली होने के कारण)स्पर्श करता हुआ निकल गया , यह श्याम बाबा की कृपा थी, जिन्होंने सही समय पर आकर मुझे बचा लिया,(खाटू श्याम जी के चमत्कार)

फिर नहाने के बाद मैं एक मिनट के लिए भी नहीं रुका और श्याम बाबा के मंदिर में पहुँच गया। 5 मिनट के लिए वहाँ ध्यान लगाया, यह बिल्कुल सच है। लेकिन मेरे पास इसके बारे में कोई सबूत नहीं है या मुझे इसके बारे में या बाबा श्याम के बारे में पता है। मेरे प्रसिद्ध होने की कामना नहीं, श्याम बाबा मुझे पहचानते हैं, बस इतना ही काफी है …. !! श्याम बाबा सभी भक्तों पर ऐसी कृपा बनाए रखें। बोल श्याम प्यारे की जय |

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