चन्द्र ग्रहण – क्या करे , क्या ना करे

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चंद्र ग्रहण एक घटना है जो पृथ्वी की छाया के परिणामस्वरूप सूर्य के प्रकाश को अवरुद्ध करती है। कुल, आंशिक और पेनुमब्रल तीन प्रकार के चंद्र ग्रहण हैं। चन्द्र ग्रहण

5 जून 2020 को, चंद्रग्रहण चंद्रग्रहण होगा। पेनुमब्रल चंद्र ग्रहण के मामले में, सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा पूरी तरह से संरेखित हैं।

पृथ्वी चंद्रमा की सतह तक पहुँचने से सूर्य की कुछ रोशनी को अवरुद्ध करती है और चंद्रमा के एक हिस्से को अपनी बाहरी छाया के साथ कवर करती है, जिसे पेनम्ब्रा के रूप में भी जाना जाता है। पेनम्ब्रा पृथ्वी की छाया के अंधेरे कोर की तुलना में बेहोश है,

और इसलिए इसे एक सामान्य चंद्रमा से अलग करना मुश्किल हो सकता है। 5 जून 6 जून को होने वाले पेनुमब्रल चंद्र ग्रहण को ‘स्ट्राबेरी मून एक्लिप्स‘ के नाम से भी जाना जाता है। स्ट्रॉबेरी चंद्रमा ग्रहण 2020 जून 5 – जून 6 (चन्द्र ग्रहण – क्या करे , क्या ना करे)

तारीख और समय चन्द्र ग्रहण

अब यहां एक दिलचस्प तथ्य है। 2020 के इस जून चंद्र ग्रहण को स्ट्रॉबेरी मून एक्लिप्स के रूप में जाना जाता है क्योंकि इस महीने के दौरान जंगली स्ट्रॉबेरी पकने लगती हैं, एशिया, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका में लोग स्ट्राबेरी मून को देख सकते हैं कि इस प्रथमाक्षर चंद्रग्रहण के अधिकतम चरण के दौरान एक छाया गहरा है। (चन्द्र ग्रहण – क्या करे , क्या ना करे)

आकाश के स्पष्ट होने पर पृथ्वी की रात में हर जगह से ग्रहण दिखाई दे सकता है। चंद्रग्रहण 5 जून को 23:15:51 पर शुरू होगा। अधिकतम ग्रहण 00:54:55 (6 जून) को दिखाई देगा और 02:34:03 को समाप्त होगा। 6 जून।

कब लगेगा चन्द्र ग्रहण

आज रात में चंद्र ग्रहण लगेगा. इसकी जानकारी सभी लोगों को होनी चाहिए. आज जो ग्रहण लग रहा है, यह ग्रहण इस साल का दूसरा चंद्र ग्रहण होगा. पहला चंद्र ग्रहण जनवरी में लगा था. इस बार का चंद्र ग्रहण सामान्य से अलग लगने जा रहा है. इस बार आप चंद्र ग्रहण देख भी सकेंगे और इस दौरान खा-पी भी सकेंगे. (चन्द्र ग्रहण – क्या करे , क्या ना करे)

हिंदू पंचांग के अनुसार 5 जून को ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि पर चंद्र ग्रहण लगेगा. यह चंद्र ग्रहण उपछाया ग्रहण होगा. यह सिर्फ धुंधला सा दिखाई देगा. आप काफी ध्यान से देखेंगे तो ही समझ में आ पाएगा. ग्रहण मध्य रात्रि 11 बजकर 16 मिनट से रात 2 बजकर 34 मिनट तक रहेगा.

इसे पूरे भारत में देखा जा सकता है. इस दौरान चंद्रमा वृश्चिक राशि में होंगे. इसे शास्त्रों के अनुसार 5 जून को लगने वाला चंद्र ग्रहण सामान्य चंद्र ग्रहण से अलग रहेगा, इसे उपछाया ग्रहण कहते है. इसमें कोई सूतक काल नहीं माना जात है. वहीं,

इस दौरान आप पूजा पाठ भी कर सकेंगे. इस समय खाने पीने पर कोई पाबंदी नहीं होती है. लेकिन इस समय पूरी दुनिया कोरोना से जूझ रही है. इसलिए इस ग्रहण को ज्योतिष बहुत ही प्रभावशाली मान रहे है. इस ग्रहण के बाद यह देखना है कि क्या देश-दुनिया में कोरोना वायरस पर क्या असर पड़ेगा.

वहीं इसी महीने 21 जून को सूर्य ग्रहण लगेगा. सूर्य ग्रहण पर सबकी नजर बनी हुई है. आज जो ग्रहण लग रहा है, इस ग्रहण का भी प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा. (चन्द्र ग्रहण – क्या करे , क्या ना करे)

इस साल के कुल चन्द्र ग्रहण

आज रात में चंद्र ग्रहण लगेगा. इस साल कुल पांच ग्रहण लग रहे हैं. इनमें से दो ग्रहण जून महीने में पड़ रहे हैं. वहीं, एक ग्रहण जनवरी में लग चुका है. इस बार लगातार तीन ग्रहण लग रहे है. एक ग्रहण आज लगेगा, वहीं दूसरा ग्रहण 21 जून को लग रहा है.

इसके बाद फिर एक ग्रहण 05 जुलाई को लगेगा. इसलिए ज्योतिषियों के लिए यह थोड़ा चिंता का विषय बना हुआ है. वहीं, 21 जून को लगने वाला सूर्य ग्रहण बड़ा सूर्य ग्रहण होगा. यह ग्रहण 5 जून और 6 जून के मध्य लगेगा. यह ग्रहण उपछाया चन्द्रग्रहण होगा. उपछाया चन्द्रग्रहण तब होता है,

जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी घूमते हुए आती है, लेकिन यह तीनों एक सीधी लाइन में नहीं होते, ऐसी स्थिति में चांद की छोटी सी सतह पर अंब्र नहीं पड़ती है. पृथ्वी के बीच से पड़ने वाली छाया को अंब्र कहा जाता है. चांद के शेष हिस्से में पृथ्वी के बाहरी हिस्से की छाया पड़ती है,

जिसे उपछाया कहा जाता है. इससे पहले दस जनवरी को साल का पहला चन्द्रग्रहण लगा था, वह भी उपछाया चंद्र ग्रहण था.

चन्द्र ग्रहण के दिन क्या नहीं करना चाहिए

चंद्रग्रहण के दौरान कई कार्य वर्जित होते हैं. इन कार्यों को करने में इसलिए मनाही होती है, क्योंकि इससे हमारे जीवन में दुष्प्रभाव पड़ते हैं. चंद्रग्रहण के दौरान बहुत से कार्य वर्जित रहते हैं, जैसे चंद्रग्रहण काल के समय भोजन करना वर्जित होता है.

ग्रहण के दिन फल, फूल, लकड़ी पत्ते आदि तोड़ने को मना किया जाता है. ग्रहण के दौरान तुलसी पौधा नहीं छूते हैं, इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को चंद्र ग्रहण के समय विशेष ध्यान रखना होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसी महिलाओं को चंद्र ग्रहण नहीं देखना चाहिए.

चंद्र ग्रहण देखने से शिशु पर दुष्प्रभाव पड़ता हैं. गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के समय कैंची, चाकू, सिलाई, कटाई आदि से कोई वस्तु नहीं काटनी चाहिए. इसके अलावा ग्रहण काल में भोजन करना, जल पीना, केश बनाना, सोना, मंजन करना, वस्त्र नीचोड़ना, ताला खोलना आदि वर्जित होता है

ग्रहण के समय भोजन नहीं करना चाहिए भोजन करने से अनेक प्रकार के व्याधियों से ग्रसित हो सकते है। यही कारण ग्रहणकाल में भोजन करना निषेध है उस समय घर में रखा हुआ खाना या पेय पदार्थ पुनः उपयोग करने लायक नहीं होता है।

हाँ ग्रहण या सूतक से पहले ही यदि सभी भोज्य पदार्थ यथा दूध दही चटनी आचार आदि में कुश या तुलसी का पत्तारख देते है तो यह भोजन दूषित नहीं होता है और आप पुनः इसको उपयोग में ला सकते है।

सूतक एवं ग्रहण काल में झूठ, कपट, डिंग हाँकना आदि कुविचारों से परहेज करना चाहिए। ग्रहण काल में व्यक्ति को मूर्ति स्पर्श, नाख़ून काटना, बाल काटना अथवा कटवाना, निद्रा मैथुन आदि कार्य नहीं करना चाहिए।
इस काल में स्त्री प्रसंग से नर-नारी दोनों को बचना चाहिए अन्यथा आँखो की बिमारी होने का गंभीर खतरा बना रहता है।

इस समय बच्चे, वृद्ध,गर्भवती महिला, एवं रोगी को यथानुकूल खाना अथवा दवा लेने में कोई दोष नहीं लगता है।
ग्रहण काल में शरीर, मन तथा बुद्धि में सामंजस्य बनाये रखना चाहिए मन-माने आचरण करने से मानसिक तथा बौद्धिक विकार के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य का भी क्षय होता है। (चन्द्र ग्रहण – क्या करे , क्या ना करे)

ग्रहणकाल में मन, वचन तथा कर्म से सावधान रहना चाहिए।

क्या करे चन्द्र ग्रहण के दिन

हजारों धार्मिक श्रद्धालुओं/आस्थावानों के द्वारा अक्सर यह प्रश्न पूछा जाता है कि के समय क्या करें, क्या न करें। इन प्रश्नों का उत्तर है ग्रहण के समय हमें स्वयं के कल्याणकारी इच्छाओं के पूर्ति हेतू स्नान, ध्यान, दान, मन्त्र, स्तोत्र-पाठ, मंत्रसिद्धि, तीर्थस्नान, हवन-कीर्तन इत्यादि कार्यो का सम्पादन करना चाहिए।

चंद्रग्रहण के समय धार्मिक श्रद्धालु लोगों को अपनी राशि के अनुसार दान योग्य वस्तुओं का संग्रह करके संकल्प करना चाहिए तत्त्पश्चात् ग्रहण मोक्ष के अनन्तर अथवा अगले दिन सुबह सूर्योदय काल में स्नान करके संकल्प पूर्वक अपने सामर्थ्य के अनुसार योग्य ब्राह्मण को चावल, दूध और दही, शक्कर, चांदी, सफेद फूल इत्यादि का दान करना चाहिए।

कोनसी राशि के लिए सही है चन्द्र ग्रहण और कोनसी राशि के लिए नहीं

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिस राशि में ग्रहण घटित होता है उस राशि वाले जातक पर ग्रहण का कुप्रभाव अवश्य ही पड़ता है। यह चंद्र ग्रहण मिथुन राशि में घटित हो रहा है, इस कारण वृष राशि वाले जातको को विशेष रूप से सावधान रहने की जरूरत है।

ग्रहण के कुप्रभाव से बचने के लिए उन्हें पूजा-अर्चना, मंत्र का जाप , भजन कीर्तन इत्यादि करना चाहिए। यह ग्रहण मेष, सिंह तुला कुम्भ मीन राशि वालों के लिए यह शुभ होगा तो वहीं यह ग्रहण वृष, मिथुन, कर्क, धनु मकर वृश्चिक राशि वालों के लिए भी दुखदायी हो सकता है। (चन्द्र ग्रहण – क्या करे , क्या ना करे)

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