दिमाग कैसे काम करता हैं

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हमारा हर फैसला दिमाग से ही होता है यह तक की हमारे खाने की पसंद का भी हमारे खाने की चाहत हमारे दिमाग मैं ही होती है हम जो भी खाते है उसका २० % हिस्सा हमारा दिमाग ले लेता है( दिमाग कैसे काम करता हैं)

लेकिन हमारी चाहत का केंद्र पुरे शरीर का ध्यान रखता है और यही विटामिन और दुसरे खनिज तत्वों की मांग करता है( दिमाग कैसे काम करता हैं)

जब शरीर मैं किसी भी चीज़ की कमी होती है तो हमारा दिमाग किसी भी हद तक जाकर उस कमी को दूर करता है
हम जब भी कोई फैसला लेते है या किसी नतीजे पर पहुचते है तो उससे पहले हमारे दिमाग मैं कई सवाल चल रहे होते है और द्वंद होते है सहज बोध और तार्किकता का और इस द्वंद मैं जिसकी जीत होती है हमारा नतीजा उसी से प्रभावित होता है( दिमाग कैसे काम करता हैं )

आपका दिमाग आपकी सबसे कीमती सम्पति है आप सब जानते है आपके दिमाग के 2 स्तर होते है चेतन और अवचेतन

आप आपके चेतन मन से विचार करते है आपके आदतन विचार आपके अवचेतन मन मैं उतर जाते है जो आपके विचारो के प्रतिरूप परिस्तिथिया बनाता है आपका अवचेतन मन आपकी भावनाओ का आधार है यह रचनात्मक है ( दिमाग कैसे काम करता हैं)

अगर आप अच्छा सोचते है तो आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे अगर आप बुरा सोचते है तो आपको बुरे परिणाम मिलेंगे आपका दिमाग इसी तरह काम करता है जब अवचेतन मन किसी विचार को स्वीकार कर लेता है तो वह इस पर काम करने लगता है

अवचेतन मन का नियम अच्छे और बुरे दोनों पर समान रूप से कार्य करता है कई बार ये आपकी मुश्किलों का समाधान तत्काल सोच लेता है जबकि कई बार दिनों सप्ताहों या इससे भी ज्यादा समय लग सकता है इसके तरीके अबूझ है(दिमाग कैसे काम करता हैं)

चेतन और अवचेतन मन दो दिमाग नहीं है वह तो एक ही दिमाग मैं होने वाली दो गतिविधियों के छिद्र है आपका चेतन मन तार्किक दिमाग है यह दिमाग का वह हिस्सा है जो विकल्प चुनता है जैसे की आप अपना घर अपनी पुस्तके आदि वस्तुए चुनते है आप अपने सारे निर्णय अपने चेतन मन से करते है और आपके चेतन चुनाव के बिना ही आपका ह्रदय अपने आप अपना काम करता है(दिमाग कैसे काम करता हैं)

और पाचन रक्त संचार और श्वास लेने की अनिवार्य प्रकियाए चलती रहती है ये सारे काम आपका अवचेतन मन करता है इन प्रकियाओ के लिए आपके चेतन मन के नियंत्रण की जरुरत नहीं होती है आप अपने अवचेतन मन पर जो भी छाप छोड़ते है या आप जिसमे भी प्रबल विश्वास रखते है

आपका अवचेतन मन उसे तुरंत स्वीकार कर लेता है यह आपके चेतन मन की तरह कोइ भी तर्क नहीं करता है या बहस नहीं करता है आपका अवचेतन मन उस मिटटी की तरह है जो किसी भी तरह के बीज को स्वीकार कर लेती है आपका अवचेतन मन हर उस चीज़ को सच मान लेता है जिसे आपका चेतन मन मानता है इसलिए आप ऐसे विचार चुने जो आपको सुख पहुचाये और आपकी आत्मा को ख़ुशी से भरे( दिमाग कैसे काम करता हैं )

जब आप आपके चेतन और अवचेतन मन की आपसी कार्यविधि को समझ लेते है तो आप प्रार्थना करने की बेहतर कला को सिख जाते है आप अपने अवचेतन मन को कुछ भी बताये उसमे बहस करने की क्षमता नहीं होती क्युकी अगर आप इसे गलत जानकारी देंगे तो भी यह उसे सच मान लेगा फिर यह उस जानकारी को सही बनाने के लिए कार्य करेगा( दिमाग कैसे काम करता हैं)

अवचेतन मन एक रोबोट की तरह है जिस पर नियंत्रण चेतन मन द्वारा किया जाता है अवचेतन मन स्वयं कुछ अच्छा बुरा नहीं सोच सकता वो तो बस पहले से की गयी प्रोग्रामिंग के अनुसार स्वचालित तरीके से कार्य करता है हमारे हर एक विचार का अवचेतन मन पर प्रभाव पड़ता है | आप जो सोचते है उसका सीधा असर अवचेतन मन पर पड़ता है और कुछ समय बाद आपको नज़र भी आने लगता है |

(दिमाग कैसे काम करता हैं)

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