दिल और दिमाग मैं किसकी सुने

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दिल और दिमाग 😀
Mind V/s Heart

आज हम सब को एक ही विषय परेशान करता है दिल की सुनु या दिमाग की |
तो किसी की भी सुनने से पहले हमे उसके बारे मैं पता होना चाहिए तभी हम निर्णय ले पायेंगे की किसकी सुननी चाहिए हमे

हमारा जो दिल होता है वो कभी कुछ कहने की कोशिश नहीं करता है क्युकी दिल का काम है शरीर म खून का संचालन करना हमारे शरीर मैं खून पहुचाना मतलब आप जिसे दिल की आवाज़ कह रहे है वो वास्तव मैं दिल की आवाज़ ना होकर आपके अन्दर छुपी भावनाए होती है जो आप महसूस करते है | (दिल और दिमाग मैं किसकी सुने)

और जिससे आप दिमाग की आवाज़ कह रहे है वो एक तरह का तर्क है |

जैसे आप आपकी ज़िन्दगी मैं कुछ ऐसा करना चाहते है जहा आपका दिल लगे , जहा लोग आपको जाने पहचाने , जहा आप खुद अपनी ज़िन्दगी के मालिक हो लेकिन आपका दिमाग वो कहा चुप बैठने वालो मैं से है उसी वक़्त आपके दिमाग से आवाज़ आएगी की अगर ऐसा नहीं हुआ तो ?(दिल और दिमाग मैं किसकी सुने)

इसका उल्टा हो गया तो ?

तो यही आकार हम रुक जाते है और सोच मैं पड जाते है की किसकी सुने
आप मैं से बहुत से लोग कहेंगे की दिल की सुननी चाहिए तो आप ये बताओ दिल सोचता है या धडकता है
दिमाग का काम है सोचना

जैसे आप नया काम कर सीखना चाहते हो तो आप उसे जल्दी से सीखना पसंद करेंगे या 1-2 सालो मैं ?
जाहिर सी बात है आप जितना जल्दी हो सके उस काम को सिखाना पसंद करेंगे |

तो यह आपका विचार हुआ ऐसा कभी नहीं हुआ है की आपके दिल ने कभी कोई विचार उत्पन्न किया हो |
दिल का काम है शरीर म खून का संचालन करना तो उसे वो काम करने दे (दिल और दिमाग मैं किसकी सुने)

जैसे आप कही तेज दोड़कर गए या सीढ़िया चढ़ते उतरते है तो आपकी सांसे फूलने लगेगी तो इस परिस्तिथी मैं दिल कुछ भी नहीं कह रहा है ये तो प्रक्रति की प्रकिया है जो खुद हो रही है इसे आपको करना नहीं पड रहा है |
जैसे आप सांस लेते है तो क्या पहले सोचते है की सांस लेनी है ?

क्युकी ये काम अगर सोच को दे दिया जाए तो आप तो सांस लेना ही भूल जायेंगे
तो होता ये है की दिल और दिमाग नहीं होता है
होती है विचार और भावनाए(दिल और दिमाग मैं किसकी सुने)

जिससे आपको लगता है दिल और दिमाग बोल रहा है जबकि ये अलग अलग नहीं है क्युकी जैसे आपके विचार होंगे वैसी ही आपकी भावनाए होंगी

जैसे आप खुश रहना चाहते हो तो स्वभाविक सी बात है आप सकारात्मक उर्जा महसूस करोगे और इसी का उल्टा अगर आप दुखी किसी बात को लेकर चिंता , तनाव के बारे मैं सोचोगे तो आप महसूस भी वैसा ही करोगे
तो मतलब ये हुआ की आपके विचार ही आपकी भावनाए बनाती है (दिल और दिमाग मैं किसकी सुने)

जब आप किसी इन्सान के साथ अच्छे से रह रहे हो तो आप यही सोचोगे की ये इंसान अच्छा है लेकिन किसी कारण उस इंसान ने कुछ ऐसा कर दिया जो आपको पसंद ना हो तो आप तुरंत सोच लेंगे की वो बुरा है |

विचारों मैं बहुत तेजी होती है विचार बहुत जल्दी बदल जाते है लेकिन हमारी भावनाए जल्दी नहीं बदलती उन्हें बदलने मैं समय लगता है |( Mind V/s Heart )

जब आप छोटे थे तो कई बाते आपके दिमाग मैं डाली जाती थी आप ही सोचिये अगर कोई सुचना आपके दिमाग मैं ना डाली जाए तो क्या आप दिमाग की आवाज़ सुन पायेंगे ?

उस वक़्त आपका दिमाग तो क्या आपका दिल और आपका मन कोई जवाब नहीं देगा |
अगर आप किसी बात को समझ लेते हो तो आपका आपका दिल और मन उस बात को तुरंत स्वीकार कर लेता है |( दिल और दिमाग मैं किसकी सुने)

किसी भी काम के बारे मैं सोचने से पहले ये जरुर जान लेना चाहिए की ये काम आगे चलकर आपके लिए सही रहेगा क्या क्युकी आपको कुछ भी ऐसा नहीं करना है जिसकी वजह से आप खुद खुद के खिलाफ हो जाओ क्युकी बहुत लोग ऐसे भी होंगे जो आपको गलत कहेंगे आपके खिलाफ होंगे लेकिन अगर आप खुद अपने खिलाफ हो जाओगे तो इससे जीवन नहीं चलेगा

“ क्युकी जब आप पैदा हुए थे तो सबने खुशी मनायी थी लेकिन आप रोये थे “

इसलिए अपना जीवन ऐसे जियो की

“ जब आप मरो तो सब रोये लेकिन आपको अपने आप पर गर्व हो “

क्युकी

“ मैदान मैं हारा इंसान फिर से जीत सकता है लेकीन मन से हारा इंसान कभी नहीं जीत सकता “

अगर आप अभी भी यही सोच रहे है की किसकी सुननी चाहिए दिल या दिमाग तो उस वक़्त आपको आपके अंत को ध्यान मैं रखकर सोचना चाहिए की अंत मैं आपको इसका क्या परिणाम मिलेगा

अगर आप किसी को कुछ निर्णय लेने के लिए कहते हो तो उनमे से कुछ दिल की सुनेगे और वही करेंगे लेकिन उन मैं से कुछ लोग ऐसे भी होंगे जो दिमाग की सुनेंगे और वही करेंगे तो यह आपको दुसरे क्या सोचते है उससे मतलब नहीं रखना है आप खुद को समझो क्युकी

“ जीवन का पहला और अन्तं उदेश्य एक ही है खुद को जानना “

अब यहाँ बहुत से लोग ऐसे भी होते है जो कहते है दिल सही है तो आप बताइए हर हफ्ते हर दिन रिश्ते क्यों टूटते है ? जिनका रिश्ता टूटता है उनके बिच क्या प्यार नहीं होता है ? और अगर दिमाग सही है तो बड़े व्यापारियों का हर दिन नुकसान क्यों होता है क्या वो दिमाग से नहीं सोचते |

अगर आप दिमाग और दिल को आपकी सफलता या असफलता के हिसाब से सोचते हो तो आप गलत हो क्युकी आपका दिल आपको ये सुनिश्चित करने मैं सहायता करता है की आपको क्या पसंद है और आपको किस चीज़ से लगाव है( दिल और दिमाग मैं किसकी सुने)

और आपका दिमाग आपको ये सुनिश्चित करने मैं सहायता करता है की आपके लिए क्या सही है और क्या सही रहेगा
आपको उसी की सुन के निर्णय लेना चाहिए जिससे आपकी आत्मा को स्वीकार हो |

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