ध्यान के बारे में गोतम बुद्ध के सूत्र

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ध्यान आईए प्रियजनों ध्यान के विषय में अब तक आपकी जो भी सोच थी वह बदलने वाली है। आइए इस कहानी से समझते हैं। एक बार गौतम बुद्ध से कोई पूछता है बुद्ध में ध्यान में प्रवेश कैसे करूं। बुद्ध कहते हैं स्वयं का अवलोकन करके जो व्यक्ति बिना किसी पक्ष के अपने भीतर देख सकता है। उसे ध्यान की पहली झलक मिलने में ज्यादा समय नहीं लगता और अगर एक बार किसी को ध्यान की पहली झलक मिल जाए तो वह चाहकर भी अपने आप को ध्यान से अलग नहीं कर सकता। (ध्यान के बारे में गोतम बुद्ध के सूत्र)

ध्यान में कठिनाई परम ज्ञान पाने तक की नहीं है। कठिनाई केवल उस घटना तक की है जिसे हम ध्यान के सागर की पहली बूंद कहते हैं। जो लोग ध्यान करना चाहते हैं उनके लिए लक्ष्य परम ज्ञान नहीं है। ज्यादातर लोग परम ज्ञान को लक्ष्य मानकर चलते हैं। उनके लिए लक्ष्य है ध्यान का पहला अनुभव क्योंकि अगर किसी ने एक बार ध्यान का स्वाद चख लिया तो यह संभव नहीं कि वह ध्यान करना छोड़ दें।

ध्यान के बारे में गौतम बुध के द्वारा दिए गए सूत्र

और अगर आप गौतम बुध के द्वारा दिए गए इस सूत्र को समझ गए तो आपको ज्यादा समय नहीं लगेगा ध्यान का स्वाद चखने में। तो चलिए इस सूत्र को गहराई से समझते हैं। बुद्ध कहते हैं स्वयं का अवलोकन करो। स्वयं का अवलोकन मतलब सेल्फ ऑब्जर्वेशन या साधारण शब्दों में हम इसे देखना भी कह सकते हैं। अब यहां पर बुध आंखो से देखने की बात नहीं कर रहे हैं।

देखा सिर्फ आंखों से ही नहीं जाता आंखों के बिना भी देखा जा सकता है। बुद्ध यहां पर उसी देखने की बात कर रहे हैं। अब यह तो समझ आ गया कि देखना है पर कैसे देखना है। क्या देखना है? और कहां देखना है। बुद्ध कहते हैं उसकी आंखों से देखना है। अपने भीतर देखना है जैसे ही हम अपनी आंखों को बंद करते हैं तो बाहर दिखना बंद है जाता है।

ध्यान
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और भीतर दिखना शुरू अब आप सोच रहे होंगे कि एक प्रश्न का उत्तर तो रह ही गया कि अपने भीतर क्या देखना है। इस प्रश्न का उत्तर है देखने के लिए कई चीजें हैं जैसे विचार भावनाएं परंतु यह बदलती रहती हैं। केवल एक चीज है जो कभी नहीं बदलती और ना कभी बदलेगी वह है आप की सांस। आपके विचार पैदा होंगे मर जाएंगे भावनाएं पैदा होंगी मर जाएंगी केवल सांस ही है जो आपके मरते दम तक आपके साथ रहेगी। इसलिए ध्यान में अपनी आती-जाती सांस को देखें। अब हो सकता है आपके मन में प्रश्न उठे कि सांस को देखने से क्या होगा तो इस प्रश्न का उत्तर है शरीर की स्थिरता बढ़ेगी शरीर की स्थिरता के कारण मन भी स्थिर होने लगेगा।

और जब मन और शरीर दोनों स्थिर होंगे तो ध्यान की संभावना पैदा होगी। परंतु समस्या यह है कि हमें पता भी नहीं लगता और हमारा ध्यान हमारी सांसो से हटकर हमारे विचारों में चला जाता है। ऐसी स्थिति में क्या करें? ऐसी स्थिति में गौतम बुद्ध के इस सूत्र का उपयोग करना चाहिए की यदि ध्यान विचारों पर जाता है तो अपने विचारों का अवलोकन करो अपने विचारों को देखो पूरे होश के साथ देखो। अपने विचारों को देखते वक्त जो आप सबसे बड़ी गलती करते हैं। वह यह है कि आप कुछ विचारों को सही मानते हैं। और कुछ विचारों को गलत इसलिए आप सही विचारों का तो पक्ष लेते हैं और गलत विचारों को अपने से दूर करते हैं।

बुद्ध कहते हैं निष्पक्ष भाव से अवलोकन करो क्योंकि जब तुम किसी विचार का पक्ष लेते हो तो तुम उस विचार में ही खो जाते हो इसलिए किसी विचार का पक्ष ना लें और ना ही किसी विचार के विरोध में खड़े रहे। शुरुआत में यह थोड़ा कठिन होता है। परंतु लगातार प्रयास से यह संभव है। अब एक चीज जो ध्यान करने की लिए सबसे जरूरी है वह है आपका स्वास्थ्य क्योंकि अगर आपका शरीर स्वस्थ नहीं होगा तो ध्यान में आप की पहली अड़चन है आपका शरीर बनेगा।

जब सिद्धार्थ परम ज्ञान की खोज में थे तो किसी के कहने की वजह से उन्होंने भी अपने शरीर को बहुत हानि पहुंचाई थी। जिसका अहसास उन्हें बाद में हुआ उन्होंने जाना कि अस्वस्थ शरीर के साथ कोई भी यात्रा पूरी नहीं की जा सकती। इसलिए आप अगर ध्यान के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहते हैं। तो अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें धन्यवाद।

FAQ’s

बुद्ध किसका ध्यान करते थे?

विपश्‍यना (Vipassana) एक प्राचीन ध्‍यान (Meditation) विधि है, जिसका अर्थ होता है देखकर लौटना. इसे आत्‍म निरीक्षण और आत्‍म शुद्धि की सबसे बेहतरीन पद्धति माना गया है. हजारों साल पहले भगवान बुद्ध ने इसी ध्‍यान विधि के जरिए बुद्धत्‍व हासिल किया था. यही नहीं, उन्‍होंने इसका अभ्‍यास अपने मानने वालों को भी कराया था.

बुद्ध के पंचशील सिद्धांत क्या है?

ये पंचशील हैं-हिंसा न करना, चोरी न करना, व्यभिचार न करना, झूठ न बोलना एवं नशा न करना।

बौद्ध धर्म के प्रमुख सूत्र वाक्य कौन कौन से हैं?

परिश्रम के साथ प्रयास करते रहो। आप को जो भी मिला है उसका अधिक मूल्यांकन न करें और न ही दूसरों से ईर्ष्या करें। वे लोग जो दूसरों से ईर्ष्या करते हैं, उन्हें मन को शांति कभी प्राप्त नहीं होती। अतीत पर ध्यान केंद्रित मत करो, भविष्य का सपना भी मत देखो, वर्तमान क्षण पर ध्यान केंद्रित करो।

बुद्ध किसकी पूजा करते थे?

किंवदंती है कि देवी तारा की आराधना भगवान बुद्ध करते थे। हिन्‍दुओं के लिए सिद्धपीठ काली का मंदिर है।

पंचशील संधि के पांच सिद्धांत कौन से हैं?

एक दूसरे पर आक्रमण ना करना । एक दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप ना करना । 4) समानता तथा पारस्परिक लाभ की ओर ध्यान देना । 5) शांतिपूर्ण सह अस्तित्व की ओर अग्रसर होना ।

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