ब्रह्मचर्य से होने वाले फायदे

ॐ नमः शिवाय
आज हम लोग बात करेंगे कि ब्रह्मचर्य से कीन-किन वस्तुओं की प्राप्ति होती है! और ब्रह्मचर्य से होने वाले फायदेउन वस्तुओं का क्या महत्व होता है! अपने जीवन में और जितने भी ब्रह्मचर्य के बारे में जितनी भी अधिक जानकारियां है! जिससे की आप ब्रह्मचर्य की और अग्रसर हो सकें! तो सबसे पहले आता है! “विद्याध्यन” जब आप ब्रह्मचर्य का पूर्ण तरीके से पालन करने लग जाए जिसमे ! आप वीर्य को रोकना वेधाध्यन करना और परमात्मा प्राप्ति अर्थात परमात्मा का चिंतन करने लग जाए तब धीरे धीरे फिर ब्रह्मचर्य से इन वस्तुओं की आप को प्राप्ति होने लग जाती है! इसमें ज्यो पहली सिद्धि होती है!

ब्रह्मचर्य से होने वाले फायदे

वह होती है विद्याध्यन! विद्याध्यन के लिए स्मृति,बुद्धि ,मेघा , स्वासथ्य इन्द्रियवश्यता और तत्परता इतनी वस्तुओं की आश्यकता रहती है। यह वस्तुएं ब्रह्मचर्य से ही प्राप्त हो सकती है। ज्यो विद्यार्थी विद्याध्यन करते समय ब्रह्मचर्य वृत का पालन नहीं करते वह कदापि सफल नहीं होते। बात करते है दूसरी सिद्धि की तो वह होती है सामर्थ्यप्राप्ति जिन्होंने भीष्मपितामा: का सामर्थ्य देखा है। वह समझते है। और समझ सकते है कि ब्रह्मचर्य की सामर्थ्य की एकमात्र सीढ़ी है। जितने योद्धा, पहलवान और वीरपुरूष देखने को मिलेंगे वह जब तक ब्रह्मचारी रहे तभी तक उनकी विजय रही। बात करते है तीसरी सिद्धि की तो वह होती है धनप्राप्ति।

धनप्राप्ति में सामर्थ्य और प्रतिभा की बड़ी आवश्यकता है। ज्यो ब्रह्मचर्य से ही प्राप्त हो सकती है। और चौथी सिद्धि यह होती है। दिर्गआयु प्राप्ति ओझ मनुष्य को जीवन शक्ती देता है। यह ओझ वास्तव में वीर्य रक्षा से उत्पन्न होता है। क्यों की वीर्य का सार ओझ है। प्राचीन काल में ज्यो महा दिर्गआयु पुरुष हो गए है। वह सभी ब्रह्मचारी थे। वीर्य नाश करने वाला व्यक्ति कदापि दिर्गआयु नहीं हो सकता। पांचवी सिद्धि होती है। ” स्वास्थय रक्षा” चाहे जितनी भी सावधानी रखिए परन्तु यदि ब्रह्मचर्य नहीं पालन किया गया तो स्वास्थय रक्षा नहीं हो सकती। ब्रह्मचर्य ही सभी दोषों को समान रखता है। छाटी सिद्धि आती है। “शुसंतानप्राप्ति” ज्यो ब्रह्मचारी नहीं है वह या तो संतान रहित होंगे या उनकी संतान रोगी, अल्पआयु और दुराचारी होगी। प्राचीनकाल में ऋषि मुनि मनोवांछित संतान उत्पन्न कर सकते थे। ।

इसका कारण यह था कि वह केवल ऋतु काल में संतान के लिए ही स्त्रीगमन करते थे। पशुओं में आज भी यही नियम है। जिस नर को अच्छा वीर्य रथा बनाना होता है। उसे खास तौर पर सुरक्षित रखा जाता है। सातवीं सिद्धि होती है। “रोगनिवृति” ब्रह्मचर्य से अनेक रोगों की निवृति हो जती है। ब्रह्मचारी कठिन रोगों के आक्रमण को अनायास ही सहन कर लेते है। परन्तु ज्यो लोग वीर्य नस्ट कर चुके है। उनकी अल्पआयु , मृत्यु अनायास ही हो जाती है। आठवीं सिद्धि होती है। “दिव्यज्ञान” दिव्यज्ञान ब्रह्मचर्य से प्राप्त होता है। ब्रह्मचारी महात्मा हो जाता है।

और वह सभी सूक्ष्म विषयों पर ठीक ठीक विवेचन कर सकता है। इस प्रकार वास्तव में संसार में ब्रह्मचर्य अत्यन्त महत्वपूर्ण वस्तु है। और जिसने इस अमूल्य रत्न को नहीं प्राप्त किया उसने कुछ प्राप्त नहीं किया। हम हमारी तरफ से ब्रह्मचर्य के बारे में जितनी व्याख्या कर सके। और जितने लोगो को ब्रह्मचारी बना सके।

उनके लिए कोशिश कर रहे है। अगर किसी के अपने – अपने कुछ भी मत है। कोई हमारी कितनी भी आलोचना के। उनसे हमें कोई फ़र्क नहीं पड़ता है। हमे सिर्फ हमारे शास्त्रों वह हमारे हिन्दू धर्म से मतलब है। उन्होंने ज्यो कहा वह इतना ओछा नहीं हो सकता। क्यों की आज के पहले जितने भी संत थे ,महात्मा थे वह हमसे कहीं गुना ज्यादा समझदार थे। और आज हमारा ज्यो स्तर है। वह आप सभी के सामने है। की हम लोग किस स्थान और किस स्तर पर जी रहे है। हमारी तरफ से जितना हो सके हम उतना प्रयास कर रहे है। और उतना ही लोगो को जागृत करने का प्रयास कर रहे है

Deep_Stranger

“Admin Of Brahmrishi Website”