ब्रह्मचार्य का पालन कैसे करें

Posted on

अगर आज का नवयुवक किसी वजह से परेशान है उन सब मैं सबसे बड़ी समस्या होती है वो है बरह्मचार्य क्युकी जितनी भी किसी तरह की परेशानिया है उन सभी को अगर गहराई से देखे तो उनमे अंतिम बात यही पाओगे उन सबका मूल बरह्मचार्य का नाश करना ही है क्युकी अगर कोई आदमी का पालन नहीं करता है या अगर कोई नवयुवक बरह्मचार्य का पालन नहीं करता है तो उसे बहुत साड़ी तकलीफे और बहुत सारे दुःख उठाने पड़ते है ( Bharamcharya kaise rakhe )

क्युकी उसके पास कुछ नही होता है अगर किसी के पास बरह्मचार्य नहीं है तो उसके पास कुछ भी नहीं है क्युकी नवयुवक है वैसे भी उसके पास कुछ होता नहीं है लेकीन अगर कोई एक शक्ति होती है वो है बरह्मचार्य की क्युकी उस समय अगर नवयुवक मैं किसी शक्ति का जागरण होता है तो वो होता है बरह्मचार्य अगर वो ही खंडित होने लग जाए और अगर वो ही ना बचे तो उसके पास कुछ नहीं बचता है इसकी वजह से उसे इतने नुकसान उठाने पड़ते है

Bharamcharya kaise rakhe 🙂

जिनका जिक्र मैं अभी करने जा रहा हु

1. जल्दी से थकान आ जाना

नवयुवक होने के बाद भी इतनी जल्दी थकान आ जाती है की जिसकी वो कल्पना भी नहीं कर सकता छोटा सा काम करता है कही भी थोड़ी मेहनत करे जल्दी से थक जाता है कुछ कर नहीं पाता हताश होक बैठ जाता है शरीर मैं ताकत नहीं बचती (ब्रह्मचार्य का पालन कैसे करें)

2. बहुत नींद आना

दिन मैं , रात मैं बस एक ही ध्यान है सोना सोना सोना इसके अलावा कुछ नहीं क्युकी शरीर मैं ताक़त नहीं बची है तो व्ही हो सकता है की नींद आएगी और उसकी वजह से शरीर मैं धीरे धीरे आलस बढ़ता है कुछ होश ही नही रहता और सारा दिन बस सोता रहता है या फिर आज कल ये मोबाइल पर लगा रहता है सारा दिन

3. सामर्थ्य का खात्मा

बिलकुल भी शरीर मैं सामर्थ्य नहीं होता है कुछ भी करने के लिए कभी सोचे लेकिन कभी कर नहीं पाता है क्योंकी शरीर मैं सामर्थ्य नहीं है पहले उसके बारे मैं सोच के उसके बारे मई सुन के ही बैठ जाते है की नहीं नहीं ये मुझसे नहीं हो पायेगा

4. दाढ़ी मुछ नहीं आना

चेहरे पर दाढ़ी मुछ नहीं आती है जिससे बहुत ही भददा लगता है | दाढ़ी मुछ अगर आ भी जाती है तो बहुत हलकी हलकी आती है और युवा होने के बावजूद भी युवा जेसे नहीं लग पाते (ब्रह्मचार्य का पालन कैसे करें)

5.शरीर का कमजोर होना

शरीर शारीरिक द्रष्टि से बहुत कमजोर हो जाता है हाथ पैर पतले पतले मुह पिचका हुआ शरीर पर कोई भी तेज नहीं है सिर के बाल गायब और मानसिक का हाल तो पूछो ही मतये सब हालत रहती है बरह्मचार्य के नाश से

6.शरीर मैं कब्ज और एसिडिटी होना

शरीर मैं इतनी एसिडिटी रहती है की कुछ भी करने का मन नहीं करता शरीर मैं धीरे धीरे आलस आने लगता है और शरीर का खात्मा होने लगता है( Bharamcharya kaise rakhe )

7.मन मैं हजारो तरह के विचार होना

मन मैं बहुत सारे विचार चलते है की मेरा क्या होगा जिसके चलते आदमी तनाव मैं चला जाता है और छोटी छोटी बातो पर विचलित होने लग जाता है | मन कमजोर हो जाता है | (ब्रह्मचार्य का पालन कैसे करें)

8.समझ और दिमाग की कमी

कुछ सोच नही पाता है समझ नहीं पाता है की क्या करे क्या नहीं करे इसकी वजह से बहुत पीछे रह जाता है | बुद्धि का जड़ हो जाना कोई भी नयी चीज़ सिखने मैं जल्दी नहीं हो पाती है क्युकी बुद्धि जड़ हो चुकी है तो कुछ कर नहीं पाता है |

9.होश का ना होना

कही भी होश नहीं रहता है कुछ पता ही नहीं चलता है की क्या हो रहा है क्या नहीं हो रहा है | कोई गाली गलोज भी दे रहा है या खुद किसी को गाली गलोज दे रहा है कोई होश नहीं कोई फर्क ही नही पड़ता क्युकी पहले बुद्धि जड़ होती है और फिर धीरे धीरे शरीर भी जड़ होने लगता है |


10 . ज़िन्दगी मैं सपने क्या होते है

मुझे ये करना है वो करना है और सच्चाई कुछ और ही होती है क्युकी समझ है नहीं और समझ पाता नहीं है और सपने बड़े बड़े लेके बैठा रहता है और जीवन मैं कुछ कर नहीं पाता है जिसकी वजह से सपने पुरे होते नहीं है और जीवन धीरे धीरे पूरा बीतता जाता है |

11.बिना बात जाने लोगो के सामने बोलना और डरना

बिना बात ही शर्म रहती है लोगो के सामने जाने मैं शर्म रहती है उनके सामने कुछ बोल नहीं पाता है अगर हजारो लोगो के सामने बोलने के लिए कह दो तो पसीना छुट जाता है एक तरीके से मरना हो जाता है क्युकी सामर्थ्य नहीं है बोलने का और अगर सबके सामने खड़ा भी हो जाए बोलने के लिए तो भी सही तरीके से कुछ बोल नहीं पायेगा क्युकी अन्दर से बहुत ज्यादा घबराहट होती है | ( Bharamcharya kaise rakhe )
ये सब नुकसान होते है बरह्मचार्य पालन ना करने से

अब फायदे के बारे मैं बात करते है 😉

1.सामर्थ्य होना

मतलब शरीर मैं और मन मैं इतनी शक्ति होना की कोई भी कल्पना करे उस कल्पना को सच करने की ताक़त रखना | हिन्दू धरम मैं एक ऋषि की कहानी है की एक ऋषि ने एक चुंगुल मैं पुरे सागर को पि लिया था इतना सामर्थ्य होता है अगर किसी हिमालय से भी जाकर कहे की यह से हिमालय हट जा तो वो हिमालय को हिला सकता है उतना सामर्थ्य होता है बरह्मऋषि मैं और बरह्मचार्य में (ब्रह्मचार्य का पालन कैसे करें)

2.शरीर मैं बहुत शक्ति और पवित्रता महसूस होना

अगर आप आज से शुरु करते है और आज से 7 या 8 दिन बाद महसूस करते हो की शरीर मैं बहुत अच्छी पवित्रता महसूस होती है और ऐसा आभास होता है की मेरे मैं बहुत सारी शक्ति है

3. शरीर का बहुत बलशाली और हल्का महसूस होना

शरीर मैं बहुत बल होता है और शरीर इतना हल्का लगता है जैसे पंखुड़ी जैसा हो | ( Bharamcharya kaise rakhe )

4. शांत और एकागी होना

एकदम शांत होना छोटी छोटी बात पर गुस्सा नहीं होना और एकार्ग्चित होना अगर कोई काम कर रहा है तो पूरा

5. ध्यान उसी काम पर लगाना

ये सब इसके फायदे होते है और भी बहुत से फायदे है जिनको आप अपनी ज़िन्दगी मैं महसूस करोगे |
अब बात करते है की बरह्मचार्य को प्राप्त कैसे किया जाए (ब्रह्मचार्य का पालन कैसे करें)

बरह्मचार्य को प्राप्त करने के लिए हमे मन और दिमाग पर पूरा नियंत्रण लाना होगा जब तक मन पर नियंत्रण नहीं है तो आपका चित एक जगह नही टिकेगा और जब तक चित एक जगह नहीं टिकता है तब तक आपके मन मैं हजारो विचार चलते रहेंगे और ले दे के आप कोई न कोई गलती कर ही दोगे |

तो सबसे पहले मन और दिमाग पर नियंत्रण चाहिए अगर मन और दिमाग पर नियंत्रण है तभी वो काम को जीत सकता है तो उसके लिए क्या करना पड़ेगा को जो प्राचीन ऋषि थे उन्होंने बरह्मचार्य को पाने के लिए 3 चीजों पर सबसे ज्यादा जोर दिया था (ब्रह्मचार्य का पालन कैसे करें)

1. वीर्य
2. वेद (ज्ञान )
3. परमात्मा

बरह्मचार्य का मतलब बस इतना नहीं होता की अपने वीर्य को रोक लिया तो आप बरह्मचार्य बन गए, नहीं
अगर अपने इस सत्य को इस तरह से रोक लिया तो ये कही न कही से उपद्रव करके निकल जायेगी और बहुत बड़ा नुकसान कर देगी इसलिए अगर बरह्मचार्य रखना ही चाहते हो तो पूरी तरह से बरह्मचार्य रखो तभी फ़ायदा है नहीं तो आप अपने वीर्य पर नियंत्रण पा लेंगे तो उससे आप कुछ कर नहीं पायेंगे और उलटे फस जायेंगे क्युकी वो सकती इतनी खतरनाक है की इसको अगर आप एक जगह से रोकोगे तो यह दूसरी जगह से निकल जायेगी

इसको कैद करना बहुत कठिन है लेकिन कठिन परिश्रम अपने ऋषि मुनियों का अनुसरण करते हुए जिनके पास इतना सामर्थ्य था की वो इस पूरी श्रष्टि से बाहर क्या होता है और कोन कोन से लोक होते है उन तक जाना और आना ये सब चीज़े करते थे तो ये बरह्मचार्य रखना बहुत छोटी चीज़ है उसके सामने इसलिए अपने ऋषि मुनियों का अनुसरण करना चाहिए |
(ब्रह्मचार्य का पालन कैसे करें)

इन 3 शक्तियों को पाने के लिए निरंतर समान भाव से साधना और चिंतन करने से वीर्य रक्षा और बरह्मचार्य को प्राप्त किया जा सकता है
जब ये तीनो चीज़े बराबर रूप से चल रही है तो बरह्मचार्य को पाना कोई दूर नहीं है उसको हम आसानी से पा सकते है |

जहा से उपद्रव शुरू होता है वो होता है चिंतन तो सबसे ज्यादा इनमे चितन का ध्यान रखा जाएगा और उसके लिए रखा जाएगा सयम क्युकी सयंम से ही हमे आत्मशक्ति और सामर्थ्य प्राप्त होगा इसलिए सबसे ज्यादा ध्यान रखा जायेगा सयंम पर क्युकी सयंम के द्वारा ही मन को रोका जाएगा और बरह्मचार्य की साधना की जायेगी
सबसे पहले आता है (ब्रह्मचार्य का पालन कैसे करें)

1. वीर्य रक्षा

उसके लिए चाहिए सयंम अतार्थ वाणी और मन को शुद्ध रखना सयंम को शुद्ध रखने के लिए मन और वाणी को शुद्ध रखना होगा | मन और वाणी को शुद्ध रखने के लिए हमे यम और नियम का अनुसरन करना पड़ेगा और यम और नियम का पालन करना पड़ेगा जिसमे यम होता है अहिंसा , बरह्मचार्य, सत्य , अपरिग्रह |

नियम होता है सोच , तप , स्वाध्याय , इश्वर ,प्रानीधाम |
ये दोनों यम और नियम इन दोनों का पालन करके ही आप वीर्य रक्षा कर पायेंगे | यम और नियम इनके अन्दर इन सभी बातो का पालन करना है |

यम के बारे मैं जानते है :

अहिंसा :- मन , वचन और कर्म से किसी भी प्राणी को ना सताना अतार्थ अपने मन से , शब्दों से या अपने कर्म से किसी भी प्राणी को नहीं सताना

सत्य :- जिस बात को जैसे जाना है वैसे ही मानना वैसे ही कहना मतलब जैसे आप कोई शास्त्र पद रहे हो तो अपने जिस बात को जैसे जाना है सत्यता दर्शनी है मतलब किसी और को देखकर ऐसे नहीं की मुझे ऐसा आभास हो रहा है नहीं बल्कि आपने जैसा जाना है न जिस चीज़ को जैसा पढ़ा है या जैसा भी समझा है उसको बिलकुल उसी तरीके से कहना या बताना

बरह्मचार्य :- स्त्री का स्मरण उसकी चर्चा उनके साथ हसी मजाक करना उन्हें लगातार घुरना एकांत मैं स्त्री के बारे मैं बात चित करना उन्हें वश मैं करने की इच्छा करना इच्छा के अनुसार चेष्टा करना और सम्भोग करना ये 8 तरह के मैथुन होते है इनसे हमे बचना है

अपरिग्रह :- किसी की कृपादृष्टि मैं नहीं रहना | किसी का दान नहीं लेना | अपना सामर्थ्य खुद बनाओ | किसी के गुलाम बनकर नहीं रहना
ये होते है यम |

अब बात करते है नियम की :-

सोच :- शरीर को शुद्ध जल और वस्तुओ से मन को शुद्ध विचारो से और आत्मा को आत्मचिंतन से शुद्ध रखना

तप :- कष्ट सहते हुए भी धर्म और निति का त्याग ना करना

स्वाध्याय :- सदा शास्त्रों को पढ़ते रहना और सुनते रहना

इश्वर प्रानीधाम :- इश्वर मैं अटल भक्ति और उसका चिंतन रखना|

Leave a Reply

Your email address will not be published.