भगवान श्री कृष्ण ने जब अर्जुन को अपना चतुर्भुज रूप दिखाया

भगवान कौन है। कैसा दिखता है। क्या सचमुच भगवान के चार हाथ होते हैं। जब ईश्वर निराकार है तो उसका कोई रूप कैसे हो सकता है। क्या वाकई ईश्वर को किसी ने देखा है और अगर देखा है तो उस निराकार ईश्वर का रूप कैसा होगा आखिर को सर्वशक्तिमान ईश्वर दिखता कैसा है। भगवान विष्णु शिव राम कृष्ण और ब्रह्मा इन सब के अलग-अलग रूप है। तो इसमें से वह कौन है जो सबसे सर्वशक्तिमान है। हर धर्म में ईश्वर एक बताया गया है। लेकिन सनातन धर्म में अनगिनत भगवान है। कैसी पहेली है यह हम कैसे पता लगाएं कि वह सर्वशक्तिमान ईश्वर आखिर हैं कौन उसका नाम क्या है? वह कैसा दिखता है? क्या वह बहुत सुंदर है? या बहुत ही भयावह है?कौन है क्या है कैसा दिखता है।

हम में से किसी ने उसे देखा तो नहीं लेकिन गीता में उसकी स्वरूप का वर्णन विस्तार से किया गया है। हम सभी ने महाभारत सीरियल में भगवान के विराट रूप को देखा तो है। लेकिन सिर्फ देखने मात्र से उस पर ईश्वर के स्वरूप को समझना संभव नहीं है। अर्जुन ने महाभारत युद्ध शुरू होने से पहले जब भगवान कृष्ण से ईश्वर रूप दिखाने की प्रार्थना की। इसके बाद भगवान कृष्ण ने अर्जुन को दिव्य दृष्टि दी और जिस सर्वशक्तिमान ईश्वर स्वरूप को अर्जुन ने देखा गीता में उसका वर्णन कुछ इस तरह से किया गया है। सर्वशक्तिमान ईश्वर के विराट रूप को देखकर अर्जुन कहता है। हे प्रभु आप के अनेक मुख मुझे दिखाई दे रहे हैं। आपके अनेक मित्र हैं आप देवी आभूषण धारण किए हुए हैं।

आपने भुजाओं में बेहद विकराल शस्त्र धारण किए हैं। आपके शरीर का कोई और छोर मुझे नजर नहीं आ रहा मुझे आप आकाश से भी ऊंचे दिखाई दे रहे हैं। मैं आपको चारों ओर से देख पा रहा हूं। मुझे हर ओर से आप मुकुट धारण किए हुए नजर आ रहे हैं। की परम तेजी से मुझे दिव्य सुगंध आ रही है। आकाश में एक हजार सूर्य एक साथ उदय हो जाए तब भी वैसा प्रकाश उत्पन्न नहीं हो सकता जैसा प्रकाश आपके दिव्य रूप से आ रहा है। अर्जुन आगे कहता है मैं आपके शरीर में संपूर्ण देवो और भूतों के समुदायों को देख रहा हूं। मुझे आपकी नेत्रों में सूर्य और चंद्र दिखाई दे रहे हैं। मैं आपके हृदय में कमल के आसन पर बैठे ब्रह्मा और महादेव को देख रहा हूं। ग्यारह रुद्र 12 आदित्य तथा आठ वसु भी मैं आपमें देख पा रहा हूं। संपूर्ण ऋषि और दिव्य सर्फ मुझे आपमें दिखाई दे रहे हैं।

मुझे मुकुट पहने आपके मुख चारों ओर से दिखाई दे रहे हैं आप गधा और चक्र धारण किए हुए हैं। आपका मुख अग्नि समान प्रतीत हो रहा है। मैं समस्त देवताओं और ब्रह्मांड को आपके मुख में देख पा रहा हूं। मुझे ना तो आप का अंत दिखाई दे रहा है। बस मुझे अनंत तक आपका ही विशाल रूप नजर आ रहा है। जिसका कोई अंत नहीं है सर्वशक्तिमान ईश्वर के स्वरूप को इतनी देर देख पाने के बाद अर्जुन भयभीत होने लगा। और कहता है। हे विष्णु आकाश को स्पर्श करते हुए आप के रुप में अनेकों रंग प्रकाशमान है। आप अपने विशाल मुख को फैलाए हुए है। और आपकी चमकती बड़ी बड़ी आंखों को देखकर मेरा मन भयभीत हो रहा है। में धैर्य धारण नहीं कर पा रहा हूं मैं ही नहीं तीनो लोक आपके इस विकराल रूप को देखकर भयभीत हो रहे हैं। आपका मुख अग्नि के समान प्रज्वलित है। आपकी विकराल दाढो के कारण यह और प्रलयंकारी प्रतीत हो रहा है। आपके मुख को देखकर मैं दिशाओं को भूल गया हूं। इसलिए है देवेश है जगन निवास आप प्रसन्न हो।

अर्जुन आगे कहता है धृतराष्ट्र के सभी पुत्र और राजाओं के समुदाय भीष्म पितामह द्रोणाचार्य कर्णं और हमारे पक्ष के भी प्रधान योद्धा आपके मुख में प्रवेश कर रहे हैं। मुझे आपकी भयानक और विकराल ढाढो में इन सभी के सिर चूर्ण होती दिखाई दे रहे है। भगवान के विराट रूप को हर ओर से देख लेने के बाद भयभीत अर्जुन को यह समझ नहीं आया कि श्रीकृष्ण ही है। या कोई और अर्जुन का धैर्य जवाब दे गया उस ने भगवान से पूछा इतने उग्र रूप वाले आप कौन हैं। तो भगवान बोले मैं इन सभी दोस्त लोगों का नाश करने वाला महाकाल हूं। मैं इस वक्त इन लोगों को नष्ट करने के लिए प्रवृत्त हुआ हूं। ईश्वर की विस्तृत महाकाल स्वरूप का वर्णन करने के बाद अर्जुन कहता है। आप वायूं यमराज अग्नि वरुण चंद्रमा और ब्रह्मा के भी पीता है। अनंत सामर्थ वाले आपको आगे से और पीछे से भी नमस्कार।

क्योंकि आप सर्वरोग है आप मुझे हर दिशा से नजर आ रहे हैं। इसलिए आपको बहुत-बहुत नमस्कार। अर्जुन आगे कहता है पहले कभी ना देखें आपकी इस आश्चर्यमय रूप को देखकर मैं हर्षित हो रहा हूं। परंतु मेरा मन भाई से व्याकुल हो रहा है। इसलिए मुझे आप अपनी चतुर्भुज विष्णु रूप को ही दिखलाइए। हे देवेश हे जगन निवास प्रसन्न होइए। इस पर भगवान बोले हे अर्जुन। मैंने अपनी योग शक्ति के प्रभाव से अपना परम तेजोमय सभी सीमाओं से परे जिस विराट रूप को तुम्हें दिखाया है। उसे तुम्हारे अतिरिक्त पहले कभी किसी ने नहीं देखा। मनुष्य लोक में इस प्रकार के विशाल रूप वाला मेरा रूप कोई ना तो कोई वेद के अध्ययन से देख सकता है।

Deep_Stranger

“Admin Of Brahmrishi Website”