भाग्य ओर कर्म

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संबंध बड़ा ही विचित्र भाव है हम जीवन मैं आगे बढ़ते है अपनों के लिए अपने परिवार के लिए हम परिश्रम करते है ताकि वो खुश रहे हमारा संबंध बना रहे लेकिन कभी कभी ये जरुरी हो जाता है की जिनसे हमारा संबंध है उन्हें रोका जाए उनके मार्ग या रास्ते मैं रुकावट डाली जाये | ( Bhagya Or Karma )

अब आप कहेंगे ये कैसी बात है ?
जिनसे हमारा संबंध है उनके रस्ते मैं रुकावट क्यों ?
तो सुनिए

“नदी की धारा मैं आया छोटा सा सेतु उसके बहने की गति को तेज कर देता है “

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इसलिए जिनसे हम प्रेम करते है उनकी आलोचना जरुरी है जिससे वो अपनी कमियों को सुधारे और सफलता प्राप्त करे |( Bhagya Or Karma )

भाग्य और कर्म दोनों के संतुलित होने पर ही सफलता मिलती है इनमे से किसी एक भी कमी आपके भाग्य को कमजोर कर देती है | हम बहुत मेहनत करते है लेकिन हमे फिर भी सबका एक प्रकार का फल नहीं मिलता | यहा किस्मत बहुत जरुरी है लेकिन किस्मत को बेहतर बनाए रखने के लिए क्या करे ?( Bhagya Or Karma )

उसके लिए आपको कुशलता पूर्वक मेहनत करनी चाहिए अर्तार्थ आप जो भी काम करे भुत्त सोच समझकर करे सावधानी पूर्वक करे मतलब सावधानी से मतलब है की पहले भविष्य का आकलन कर लेना क्युकी

“ अगर घर की नीव डालने मैं असावधानी कर दी जाए तो घर कितना ही विशाल और सुन्दर क्यों ना हो वो आज नही तो कल टूट ही जाता है |”

इसलिए सुरक्षित भविष्य का आधार है वर्तमान मैं बरती गयी सावधानी क्युकी भविष्य मैं क्या होने वाला है ये आप नहीं जान सकते लेकिन वर्तमान मैं उससे बचने के लिए खुद को काबिल जरुर बना सकते है |

“कहते है जब भाग्य बुरा चल रहा हो तो हमे मीठी नदी का पानी भी खारा लगता है “

क्या आपको भी यही लगता है ? अपने आप को थोडा समय दीजियेगा और विचार करियेगा |
लेकिन मैं कहूँगा नहीं क्युकी हर गलती का कारण भाग्य नहीं होता है उन सबका कारण होती है हमारी असावधानी( Bhagya Or Karma )

एक पहेली पूछता हु की संसार मैं सबसे अनमोल क्या है ?
तो आप मैं से कुछ कहेंगे हीरा , कुछ कहेंगे सोना , और कुछ कहेंगे मोती …
अब आप सोच रहे होंगे की इसमें पहेली क्या हुयी ? तो सुनिए ….

“जो इस संसार मैं सबसे अनमोल है वही इस संसार मैं सस्ता भी उतना ही है , वो हर स्तिथी मैं मरता भी है और उसी स्तिथी मैं जीवित भी रहता है , वो आपका सबसे बड़ा दुश्मन भी है और वही आपका सबसे बड़ा दोस्त भी “

अब आप बताईये ऐसी कोन सी वस्तु है जो इन सभी चीजो से जुडी है ?( Bhagya Or Karma )

वो है “समय”

अगर आप हर पल का उपयोग करेंगे तो वो सबसे अनमोल है और अगर आप उसका दुरूपयोग करेंगे तो वो सबसे सस्त्ता है क्युकी इसे खरीदने के लिए मोती , हीरा या पैसे इन सबकी कोई जरुरत नहीं होती है | अगर व्यक्ति इसका दुरूपयोग करता है तो वो हर पल मरता है और सदुपयोग करता है तो हर पल जीता है

क्युकी हम सबके मर जाने पर एक यही है जो जीवित रहेगा और यही है जो आपके साथ है तो आपका सबसे बड़ा दोस्त है और यही है जो आपके साथ नहीं है तो आपका सबसे बड़ा दुश्मन है | अब ये आप पर निर्भर करता है की आप इसका उपयोग कैसे करते हो |( Bhagya Or Karma )

जब आप किसी काम को करते हो उसमे अपनी पूरी मेहनत लगा देते हो और सफल हो जाते हो तो आपका मन बहुत खुश हो जाता है लेकिन उसी काम मैं अगर आप असफल हो जाते हो तो आप दुखी और उदास हो जाते है तो आप बताइए ऐसा क्यों होता है ?

ये सिर्फ हमारी मन की स्तिथी है | क्युकी हम असफल या हम तब नही हार जाते है जब सामने वाला जीत जाता है हम असफल उस वक़्त होते है जब हम खुद से हार मान लेते है |( Bhagya Or Karma )

हम असफल इसलिए होते है क्युकी हम प्रयास करना बंद कर देते है इसलिए प्रयास तब तक करिये जब तक आप अपने लक्ष्य को प्राप्त ना कर लो क्युकी जिस दिन आपने ऐसा करना शुरू कर दिया जीत आपकी निश्चित हो जाएगी |

“ कहते है क्रोधित बेल और बिगड़े हुए घोड़े के सामने से नहीं जाना चाहिए नहीं तो वो आपको नुकसान अवश्य पहुचाएंगे”

अतार्थ आपके संगती भी इसे लोगो से नहीं होनी चाहिए जो खुद के भविष्य को लेकर निश्चित ना हो क्युकी वो आपको भी वही राय देंगे जो वो स्वयं करते है इसलिए दोस्ती करते समय सावधान अवश्य रहे

हम सभी के जीवन मैं एक परेशानी रहती है की सत्य क्या है और असत्य क्या है कहते है जो हमने कानो से सुना , आँखों से देखा वही सत्य है लेकिन कई बार आँखों से देखा और कानो से सुना भी गलत हो जाता है | कुछ सोचेगे की जो मन मैं हैं वो सत्य है तो नहीं क्युकी मन तो कल्पना को भी सत्य मान लेता है |

तो सत्य है क्या ?

“ जिस प्रकार पर्वत कभी कड़वा नहीं हो सकता उसी प्रकार सत्य भी तीखा , कटु और चोट पहुचाने वाला नहीं हो सकता “

हम सभी का सबसे बड़ा गुण ये है की हम हमेशा कड़ी मेहनत करते है लेकिन हम सभी की सबसे बड़ी कमी भी है की हम छोटा रास्ता अपनाना चाहते है

“ विष पीकर शंकर महादेव हो गए और अमृत पीकर राहू केतु असुर ही रह गये “

तो सब खेल है केवल भाव और कर्मो का यदि आपके करम और लक्ष्य उचित हो तो आपकी सफलता निश्चित है और आपके करम और लक्ष्य का ही पता ना हो तो आपकी सफलता असफलता मैं बदलने मैं देर नहीं करेगी |
विपरीत परिस्तिथियों मैं क्या करना चाहिए ?

कुछ कहेंगे उनका सामना करना चाहिए लेकिन मैं ऐसा नहीं सोचता हु जब हमारी परिस्तिथिया ज्यादा खराब चल रही हो और आपको लगे आपका सब कुछ खत्म हो सकता है तो हमे उस वक़्त सामना ना करके अपने कदम पीछे ले लेने चाहिए और सही समय आने का इंतज़ार करना चाहिए और साथ मैं तयारी भी

“जैसे मरुस्थल के पोधे अपने बीजो को आवरण लगा कर सुरक्षित रखते है ताकि वर्षा की फुहार आने पर वो फल फूल सके “

ठीक उसी प्रकार हमे भी कुछ समय के लिए उस स्थान से हट जाना ही उचित है क्युकी बिना तयारी के किसी भी परिस्तिथि का सामना करना नष्ट करने जैसा है | शक्ति से सभी आकर्षित होते है परन्तु कभी कभी यही शक्ति समस्या का कारण भी बन जाती है |

वास्तविक शक्ति वही है जो शुभ करे जो विकास करने मैं सक्षम हो |
तो सब खेल है भाग्य और कर्म का अगर आप सही तरीके से रास्ते पे चलेंगे तो चोट नहीं लगेगी और और अगर आप मजे से चलेंगे तो चोट अवश्य आएगी |

( Bhagya Or Karma )

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