मंत्र विज्ञान

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अगर कोई व्यक्ति मंत्र का प्रयोग करे और मंत्र काम ना करे तो वो मंत्र को दोषी ठहराता है लेकिन इसमें मंत्र की कोई गलती नही है क्युकी मंत्र विज्ञान उसी तरीके से निर्दोष है जैसे की गणित , गणित मैं 2 + 2 = 4 होते है | यह नियम शाश्वत है यह कभी नहीं बदलता और वैसे के वैसे ही मंत्र विज्ञान है | ( Mantra Vigyaan )

काफी लोग यह कह देते है कलयुग है इसलिए मंत्र काम नहीं करता पर ऐसा कुछ नहीं है जैसे गणित शाश्वत है वैसे ही मंत्र विज्ञान भी शाश्वत है पहले भी काम करते थे अब भी काम करते है फर्क इतना आ गया है अभी का वातावरण , खान पान , आचार विचार सब अलग हो चुके है पहले की तुलना मैं इसलिए काफी बार मंत्र काम नहीं करता है बाकी मंत्र विज्ञान मैं कोई बदलाव नहीं आया है |
( Mantra Vigyaan )

मंत्र के 2 कोष होते है ……….

1. साधना अथार्थ रास्ता
2. सिद्धी अथार्थ लक्ष्य

लक्ष्य तक पहुचने के लिए आपको रस्ते से होकर गुजरना पड़ेगा तभी आप लक्ष्य तक फुचोगे . साधनाए होती है जिसमे आपका मंत्र जाप , जो भी कुछ करते करते लक्ष्य जिसमे सिद्धी मिलेगी आपको वह तक पहुचते हो साधना के द्वारा ( Mantra Vigyaan )

भारतीय विज्ञान मैं व्यक्ति के 5 कोशो के बारे मैं बताया गया है की व्यक्ति के अन्दर 5 कोष होते है .

1. अन्नमय
2. प्राणमय
3. मनोमय
4. चेतन्य्मय
5. अनामय

शरीर के 3 भाग होते है ….

1. भोतिक शरीर
2. आस्च्रल / विज्ञानं शरीर
3. मानसिक शरीर

अन्नमय और प्राणमय का समावेश भोतिक शरीर मैं होता है .
मनोमय और चेतन्यमय कोष का समावेश आस्च्रल शरीर मैं होता है .
जब मंत्र के साथ मैं भावनाए जुड़ जाए तो मंत्र काम करता है जैसे की हम लोग सोचते है की हम ये कर सकते हा तो उसके साथ हमारी भावनाए जुडी होती है हमारे शब्द जुड़े होते है |( Mantra Vigyaan )

मन 2 प्रकार से काम करता है …..

1. खुद भी कल्पना करता है
2. बाहर से आये गए निर्देश को भी स्वीकार करता है

मन के स्वस्थ होने का लक्षण भी यही है की जो उसे आदेश दिया जाए वह मान ले हम सक्रिय है या निष्क्रिय उससे कोई फर्क नहीं पड़ता यह एक व्यक्ति की तरह काम करता है हमारा मन सही से काम करे इसके लिए मन का निर्मल होना बहुत जरुरी है ओर मन निर्मल मंत्र जाप से होता है |

आपका मन निर्मल है या नहीं इसका पता करने के लिए जैसे आपको रात को 2 बजे उठना है तो आज आप रात को बिना अलार्म लगाये सोते है और रात को 2 बजे उठ जाओ तो आपका मन बहुत निर्मल है तभी तो उसने एक ही बार मैं आपका कहना मान लिया और अगर नहीं उठ पाओ तो इसका मतलब आपका मन निर्मल नहीं है |
बढती जनसंख्या से नुकसान भीड़ का होगा इससे इंसान की विचार सकती नष्ट हो जाएगी और मन और शरीर पर काबू नहीं रहेगा( Mantra Vigyaan )

आज का मानव शारीरिक दर्ष्टि से नहीं बल्कि मनसिक दर्ष्टि से दरिर्द बन गया है |
मंत्र जाप मैं हल्का भोजन लेना , सयम से रहना और ध्यान रखना आदि बाते पूर्व सावधानिया है जिससे मन अंतर्मुखी बनता है मंत्र जाप से मन की सकती उदीप्त होती है और मन शक्तिशाली बनता है और उसको एक विशिष्ट राजमार्ग मिलता है और मंत्र मैं विशिष्ट ध्वनि वाले शब्दों का प्रयोग किया जाता है क्युकी मंत्र मैं भावनात्मक और मानसिक उर्जा का अहम महत्व होता है |

हम भोतिक जगत मैं जिन शब्दों का प्रयोग करते है उनका भी महत्व अलग है जैसे हम महान और विराट शब्द का प्रयोग करते है उस शब्द का मतलब हमे उस समय पता नहीं होता है की हम लोग केसे बोल रहे है हम लोगो को बस इतना पता होता है जैसे हमने महान और विराट शब्द का प्रयोग किया तो इसका मतलब ये हो गया की

किसी महान चीज़ के लिए इन शब्दों का प्रयोग हुआ है पर इसकी वास्तविकता और अंतर्मन से तब महसूस होता है जैसे की आप रात को सो रहे हो और आपके सामने पूरा खुला आकाश है और उस आकाश की तरफ नज़रे उठा के देखो तो अनंत तारे और पिंड दिखाई देते है |
( Mantra Vigyaan )

तब जाकर आपको अहसास होता है की विराट का मतलब की होता है क्युकी उसके साथ आपकी भावनाए उस समय जुड़ जाती है( Mantra Vigyaan )

स्वयं को विराट बनाने के 2 मुख्य रस्ते है

1. मंत्र
2. योग

ये पूरा जगत 5 तत्वों से बना है और संस्कृत मैं तत्व का मतलब होता है “ब्रह्मा के भाव “

“ब्रह्मा के भाव “ के कारण ही हम इंसान , पेड़ पोधे , जिव जंतु आदि बने हुए है इस दुनिया मैं एक भी पदार्थ एसा नहीं है जो एक तत्व से बना हो इसलिए अगर किसी वस्तु से एक तत्व का आभाव हो जाए तो वो वस्तु खत्म हो जायेगी

इस विनाश की शक्ति के लिए भारतीय विज्ञान ने “उत्कांत “ शब्द का प्रयोग किया है
यमराज मृत्यु के प्रतीक है क्युकी उनके पास “उत्कांत “ करने की शक्ति है |

( Mantra Vigyaan )

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