महाभारत की एक अनसुनी दास्तां

आईये आपको बताते हे आज एक सच्ची और अनसुनी महाभारत की एक दास्तां |

महाभारत की एक अनसुनी दास्तां बात तब की हे जब अर्जुन और भगवान श्री कृष्ण महाभारत युद्ध में थे| उस युद्ध में एक से एक महान योद्धा थे कोई अपने तपोबल से प्रातः देवास्त्र का उपयोग कर युद्ध लड़ते थे तो कोई अपनी दिव्य विद्या का उपयोग कर युद्ध लड़ रहे थे| उस वक्त एक महँ और अमर योद्धा और था जिसका नाम अश्व्थामा था वः जब जन्म था तब ही दिव्या बालक के रूप में जन्म लिया था | जन्म कके वक्त उसके सर पर एक दिव्य चमत्कारी मणि थी जो उससे हमेसा अमर रखती और हर युद्ध में लड़ने की शक्ति प्रधा|न करती| महाभारत युद्ध के दौरान एक दिन उसने जोश और आवेश में आकर रात को हमला कर दिया और रात को हमला करना राजपूतो के धर्म के खिलाफ था|

अश्व्थामा ने बर्ह्माश्त्र का प्रयोग कर रत को विश्राम कर रहे वीर योद्धाओ को जलना चाहा और साथ ही गर्बवती औरते भी उस हमले में जल गयी अबला नारी पर उस कोई भी क्षत्रिय करता और वः तो गर्बवती थी | इस की वजह से भगवान श्री कृष्ण बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने सुदर्शन चक्र का हमला अश्व्थामा के माथे पर कर जिया और उस मणि को तोड़ दिया साथ ही श्रापित भी कर दिया की तुम कलयुग के अंत तक इस धरती पर जीवित रहोगे लेकिन इस मणि के बिना | और तुम्हारे शरीर पर कही रोग तुम्हे जकड लेंगे | (महाभारत की एक अनसुनी दास्तां )

उसके पश्चात युद्ध संपन्न हुआ परन्तु अश्व्थामा तो अमर था लेकिन अब श्री कृष्ण के श्राप से साथ उससे जीना था | हिन्दू धर्म की यह कुछ बाते सामान्य लोगो के दिमाग से परे हे लेकिन उनको मानने से इंकार करना एक मूर्खता ही हो सकती हे | क्यों की दोस्तों आज भी उस वीर अश्व्थामा को कहि जगहे लोग देख चुके हे जिसके प्रमाण आज हम आप के साथ शेयर करने जा रहे हे | महाभारत काल के पश्चात अश्व्थामा जंगलो में भटकते हुए भारत से बहार तिब्बत की और चले गए जहा आज भी एक आश्रम बना हुआ हे और वहाँ जाने के पश्चात् अगर पता किया जाय तो पता लगता हे की एक आदमी जो सामान्य पाय जाने वाले आदमियों से कही गुना ज्यादा बड़ा ताकतवर नज़र आता था |

परन्तु वह उस वक्त लड़ने में सक्षम नहीं थे उनके पुरे सरीर पर कोई अजीब सी बीमारी होने लगी थी और माथे के बिच एक बहुत ज्यादा गहरी चोट का निशान था जीसे सामान्य आदमी कभी नहीं जेल सकता हो वैसा निशान | वह यहाँ बहुत साल रहा और वह पर रहने वाले लोगो को लड़ने के बहुत ज्यादा प्रभावशाली तरिके सीखा कर गया | ऐसे तरीके जिसे हर कोई नहीं सिख सकता और न सीखा सकता| लेकिन वः आदमी खुद कभी लड़ने में सक्षम नहीं था | उसके पश्चात उन्होंने वह जगह छोड़ दी लेकिन आज भी वह वो जगह मौजूद हे जहा पर वह रुके थे | उसके पश्चात वह उस इलाके ंव कभी नहीं दिखे | (महाभारत की एक अनसुनी दास्तां)

उसके बाद भारत के एक प्रसिद्ध बाबा जो भारतीय वायुसेना में अपनी सेवा देने के पश्चात हिन्दू अध्यात्म को जानने में जूठ गए| जिनको पाइलट बाबा के नाम से जाना जाता हे | उन्होंने में अपनी लिखी किताब में अश्वथामा को देखे जाने की बात प्रमाण के साथ कही हे| उनका कहना था की वह जब हिमालय की और निकले थे तब उन्हें वहा पर नर्मदा नदी के किनारे बसे एक गांव का पता लगा उस गांव में भील जनजाति निवास करती थी जिसके मुखिया भी एक बाबा ही थे |

उनके साथ कुछ दिन बिताते हुए उनको एक मंदिर में कुछ दिनों से एक ऐसा मानव आता जाता दिखाई दिया जो दिखने में किसी महामानव से काम न हो| परन्तु शारीरिक हालत से वह बहुत ज्यादा बीमार दिखाई दे रहा था| और उसके माथे पर एक गहरी चोट थी जिससे हमेशा खून बेहता रहता हे| पायलट बाबा से रुका नहीं गया और उन्होंने एक दिन गांव में लोगो और उनके मुखिया से पूछ ही लिया वह आदमी कौन हे | इस पर गांव वालो की प्रतिक्रिया सामान्य रही और उन्होंने बड़े आराम से कहा की वह अश्व्थामा हे|

पाइलट बाबा को तो अपनी आँखो पर यकीं ही नहीं हुआ की ये में क्या देख रहा हु आखिर कोई आदमी इतना कैसे जी सकता हे| उनसे रहा नहीं गया और पालक जपकाय अगले दिन का इंतज़ार कीया और अगले दिन जैसे ही उन्होंने उस पुरुष को देखा उसके पीछे पीछे चल दिए और उससे पुकारने लगे| परन्तु उसने कोई उत्तर नहीं दिया | काफी जंगल के अंदर तक जाने के बाद वह रूक गए और पायलट बाबा से पीछा करने का कारण पुछा|

पायलट बाबा उनको अपने इतना करीब देख कर एक बार तो चुप ही हो गए प्रियजनों जरा आप भी सोचिये की महाभारत काल का कोई आदमी और वह भी महान गुरु द्रोणाचार्य का पुत्र अगर आप के सामने इस वक्त खड़ा हो केसा लगेगा| उसके पश्चात वह कुछ देर वह रुके और चल दिए लेकिन पाइलट बाबा ने उनसे साक्षात् मुलाकात की थी (महाभारत की एक अनसुनी दास्तां )

और उसके भी बहुत सालो पहले चीन के शासक हुआंग ने अपनी ̣ बाकी बची जिंदगी को अमर होने के लिए कोसिस करने का चुना और वह हिमालय की यात्रा में आया ताकि अमरत्व के बारे में कुछ जान सके वह उसको जंगल में एक आदमी मिला जैसा उसने अपनी सम्पूर्ण जिंदगी में नहीं देखा जैसे कोई महामानव को देख रहा हो लेकिन वः बहुत ही थका और बीमार लग रहा था और उसके सिर पर एक घाव था जिससे खून बह रहा था| उसको देख कर हुआंग से रुका नहीं गया और वह उसके पास बात करने चला आया |

बात करते करते उसको पता लगा की उसका नाम अश्व्थामा हे और वह महाभारत के युद्ध के बाद से ही उस हालत में हे | उस हालत हुआंग ने कारन पुछा क्यों की अश्व्थामा को देखकर ये नहीं कहा जा सकता की उसको कोई जल्दी घायल कर सके | तो इस पर अश्व्थामा बोले की उनकी इस दशा का कारण उनकी ही एक गलती हे| उसके बाद हुआंग वापिस चीन चला गया उसको लगा अमर होना सिर्फ कहानिया होती हे | परन्तु अश्वथामा जैसा व्यक्ति उसने आज तक कभी नहीं देखा था भले ही वह घायल और बीमार था लेकिन अभी भी उससे उतना ही तेज़ पराक्रम नज़र आता हे | हुआंग ने सोचा की वह ऐसा हे तो महाभारत के बाकि योद्धा कैसे होंगे |

और उसने महाभारत युद्ध और जगह के बारे में पता लगा तो उसके पेरो तले जमीं ही खिसक गयी | पता करने पर पता लगा की महाभारत प्राचीन काल की एक घटना हे जो न जाने कितनी सदियों पहले गठित हुई और उसने महाभारत में यह भी पढ़ा की श्री कृष्ण द्वारा अश्व्थामा को श्राप दिया गया और उसकी मणि को सुदर्शन चक्र द्वारा तोड़ दिया गया |

हुआंग को लगा था की भारत की कोई रियासत होगी जिसका कुछ दिनों पहले ही किसी के साथ युद्ध हुआ होगा और उसमे अश्व्थामा घायल हुआ होगा | परन्तु जिस युद्ध के बारे में अश्व्थामा ने बताया वह न जाने कितनी सदियों पहले की बात थी | हुआंग ने हज़ारो बार अपने सिपाहियों को भारत भेजा की अश्व्थामा कहि भी दिखे उसे मान सम्मान के साथ चीन बुलाया जाय परन्तु वह कही भी नहीं दिखे और हुआंग को हार ,माननी पड़ी | (महाभारत की एक अनसुनी दास्तां )

और उसके बाद भारत कर्नाटका में नारायण अप्पा नाम का एक गरीब ब्राह्मण था जो अपनी कथा कर्नाटक भारत के बाद कुमार व्यास के नाम से प्रसिद्ध हुआ | उसने महाभारत भी लिखी थी | दरअसल वः एक मंदिर का पुजारी भी था जो सच्चे दिल से महाभारत लिखने की आस रखता था |ए बार उसके सपने में भगवान खुद आय और उनसे कहा की इस बार जब तुम मंदिर की पूजा करने जाओ तो ध्यान से देखना की मंदिर के बहार कोनसा आदमी सबसे पहले अपना भोजन खत्म कर जा रहा हे | वही आदमी अश्व्थामा हे जो अभी भी इस धरती पर भटक रहा हे |

उसकी मदद से तुम महाभारत लिख पाओगे | कुमार व्यास ने वैसा ही किया और अश्व्थामा को पहचान लिया और उनसे हैट जोड़ कर निवेदन किया की में आप को जनता हु श्री हरी मेरे स्वपन में आये और आप से मिलकर महाभारत लिखने को कहा | इस पर अश्व्थामा राजी तो हो गए लेकिन उन्होंने कहा की तुमने किसी और भी मानव को यह बताया तो में उसी वक्त कही चला जुन्गा और तुम्हारी कथा अधूरी ही रह जायगी |

कुमार व्यास ने उनकी बात मानली लेकिन वह यह भूल गए थे की उनकी पत्नी को भी यह बात नहीं बतानी थी | उन्होंने बता दी थी और एक दिन उनकी पत्नी उनका पीछा करते हुए वह चली गयी जहा पर महाभारत लिखी जा रही थी | उनको देखकर अश्व्थामा बहुत क्रोधित हुए और वहा से चले गए | उसके बाद कुमार व्यास की महाभारत आधी ही रह गयी और उन्होंने उसको ही प्रकाशित किया जो आगे खूब प्रचलित हुई | परन्तु वह उससे पूरी नहीं लिख सके (महाभारत की एक अनसुनी दास्तां)

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