यक्षिणी साधना

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यक्षिणी साधना एक ऐसी साधना है जैसे एक पेड़ है पेड़ के उपर एक घोसला है घोसले में चिड़िया के अंडे रखे हुए है वो साधक है जो न्य साधक है जो यक्षिणी साधना करना चाहता है ( यक्षिणी साधना)

मान ले की पेड़ के उपर घोसले में चिड़िया के अंडे रखे है वो साधक है और जब घोसले में से अंडा गिर जाता है और निचे जमीन है और वो अंडा निचे गिरा नहीं है बीच में है हवा में अब उस समय स्तिथि की होगी उस अंडे की या तो निचे गिरकर वो फूटेगा या कोई निचे हाथ से उस अंडे को पकड़ लेगा दोनों स्तिथि में की होगा

क्युकी वापस तो नहीं जा सकता क्युकी घोसले से तो गिर गया और वपस तो उपर नही जा सकता मतलब यक्षिणी साधना शुरू तो कर दी तो अब आप उसको छोड़ नहीं सकते तो यही हालत होगी अंडे के जैसे आपकी क्युकी

जब एक बार अंडा उपर से गिर गया मतलब एक बार यक्षिणी साधना शुरू कर दी तो वो रुकेगी नहीं तो अब होगा क्या अंडा निचे गिरग और फुट जायेगा या फिर कोई हाथ लगाकर उसे रोकने की कोशिश करेगा तो भी टकराकर फूट जायेगा क्युकी वो नाजुक होता है ( यक्षिणी साधना)

वेसे ही एक साधक होता है एक बार अपने यक्षिणी साधना शुरू कर दी तो आपकी हालत पेड़ के उपर घोसले में रखे चिड़िया के अंडे जैसी हो जाएगी क्युकी शुरू तो आप कर देंगे लेकिन फूटेंगे ही फूटेंगे एक बार घोसला छोड़ा तो फूटेंगे ही फूटेंगे और क्यों फूटेंगे क्युकी यक्षिणी साधना बहुत ही तीव्र साधना में से एक है

सात्विक सामग्री से यक्षिणी साधना को सिद्ध करना बच्चो का खेल है ही नहीं अगर आप पवित्र वस्तुओ का उपयोग करके ये सोच ले की आप यक्षिणी साधना सिद्ध कर लोगे तो ये आसन नहीं है उसमे आपको तामसिक वस्तुओ मॉस मदिरा का उपयोग करना ही पड़ेगा और जब इन सब चीजों का उप्यो करते है तो बहुत ही तीव्र घातक साधना हो जाती है (यक्षिणी साधना)

यक्षिणी साधना 51 दिन की होती है इससे कम दिन मैं ये होगी नहीं 51 दिन करना जरुरी है यक्षिणी साधना
यक्षिणी साधना सिर्फ और सिर्फ माता रूप मैं ही सिद्ध कर सकते है अन्य रूप मैं नहीं माता रूप 51 दिन की साधना करने से पहले कम से कम 6 महीने पहले इष्ट देव की साधना करना जरुरी है जब इष्ट देव की सिद्धी पा लेंगे (यक्षिणी साधना)

चाहे वो प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष हो अगर अपने इष्ट देव की सिद्धी पा ली है उसके बाद ही आप यक्षिणी साधना में जा सकते है यक्षिणी साधना में यक्षिणी के साथ एक और देवता भी जो मंत्र जप होता है मतलब एक देवी यक्षिणी और एक देवता दो लोगो की साधना व पूजा होती है एक देवता की पूजा अवश्य होती है उसके बिना यक्षिणी सिद्ध नहीं होगी और इस दोरान बिलकुल ऐसी तेयारी करनी पड़ती है (यक्षिणी साधना)

जैसे आप माँ दुर्गा की पूजा करते हो पूर्ण सामग्री के साथ पूर्ण ब्रह्मचर्य व्रत के साथ पूर्ण इमानदारी के साथ मेहनत के साथ आपको ये साधना सिद्ध करनी होती है एकांत स्थान मैं घर मैं परिवार के साथ ये साधना आप नहीं कर सकते है (यक्षिणी साधना)

यक्षिणी साधना में 99% असफलता होती है और 1 % तब सिद्ध होती है

जब आपके गुरु को यक्षिणी साधना सिद्ध हो और आपके गुरु आपको ये साधना सिद्ध करवाए और आपको यक्षिणी साधना प्रदान कर दे अपनी और से
यक्षिणी साधना वही लोग कर सकते है जिनका परिवार न हो या जो लोग अध्यात्म से जुड़े हो वही लोग कर सकते है जिनका उनके गुरु से रोज का मिलना जुलना हो
(यक्षिणी साधना)

99 % असफल होती है यक्षिणी साधना साधको की क्युकी वो सिद्ध नहीं कर पाते है उतनी शक्ति नहीं होती साधको में उतना तपोबल नहीं होता

(यक्षिणी साधना)

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