योगा की शुरुआत कैसे करें

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योगा क्या होता है?
फायदे?
योगा करने से पहले रखी जाने वाली सावधानि
कब और कोनसी जगह?
शारीरिक अशारीरिक योगाभ्यास
प्राणायाम ( योगा की शुरुआत कैसे करें)
1. योगा क्या होता है ?

योगा हमारे जीवन से जुड़े भोतीक , मानसिक , भावनात्मक , आदि सभी पहलुओ पर काम करता है योग अतार्थ एकता या बांधना मतलब जुड़ना आद्ध्यात्मिक स्तर पर जुड़ने का अर्थ है व्यक्तिगत चेतना का एक होना
योग शरीर मन और भावनाओ को संतुलित करने और तालमेल बनाने का साधन है |

रोजमर्रा की ज़िन्दगी के तनाव और बातचीत के कारण बहुत से लोग मानसिक परिस्तिथियों के कारण परेशान रहते है योग इनका इलाज तुरंत प्रदान नहीं करता लेकिन इनका मुकाबला करने के लिए किफायती है
गीता मैं कृष्ण ने कहा है की ( योगा की शुरुआत कैसे करें )

“योग कर्मसु कोश्लम”

मतलब कर्मो मैं कुशलता ही योग है कुछ लोगो का यह कहना है की जीवात्मा और परमात्मा के मिल जाने को योग कहते है (योगा की शुरुआत कैसे करें )

योग का अर्थ है जुड़ना

जुड़ने का मतलब है अगर आप यहाँ बैठे है तो आपके अनुभव मैं सिर्फ आप ही है सारा ब्रह्मांड बस आप ही है तो किसी ऐसी चीज़ को जो आप नहीं है आप खुद के रूप मैं तभी अनुभव कर पाएंगे जब आप अपने भीतर एक ख़ास स्तर तक चीजों को समाहित करने लगे तो आप यह कह सकते है की आप योग मैं है|( योगा की शुरुआत कैसे करें )

2. फायदे

एक बार सुनने से याद हो जाये ऐसा दिमाग सभी के पास नहीं होता है अब ऐसा दिमाग करने के लिए क्या करे योग(योगा की शुरुआत कैसे करें)
क्युकी एक योग करने से हमारा शरीर स्वस्थ रहता है हमारे मन पर हमारा नियंत्रण आता है |
योग ही ऐसी चीज़ है जो आपकी ज़िन्दगी बदल देगी

अब इनके फायदे के बारे मैं जानते है

• योग करने से रोगों से लड़ने की शक्ति बढती है
• योग शारीरिक और मानसिक रूप से मानव जाती के लिए वरदान है
• जिम आदि से शरीर के ख़ास अंग का व्यायाम होता है वही योग से प्रति अंगो और ग्रन्थियो का व्यायाम होता है
• मांसपेशियों का अच्छा व्यायाम होता है जिससे तनाव दूर होकर अच्छी नींद आती है , भूख लगती है , पाचन सही रहता है

• योग करने से मोटापा कम होता है
• श्वसन संबंधी रोगों से भी राहत दिलाता है
• योग शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है

• योग न केवल आपके शरीर के लिए उपयोगी है बल्कि नियमित योग करने से आपकी मानसिक और अध्यात्मिक शक्ति का भी विकास होता है( योगा की शुरुआत कैसे करें)
• योग करने के लिए आपको कोई भी कीमती उपकरण की आवश्यकता नहीं होती है और आप योग कही भी आराम से कर सकते है
• योग न केवल आपकी बाहरी सुंदरता को बढाता है बल्कि आपको अंदर से भी मजबूत बनाता है

3. योगा करने से पहले रखी जाने वाली सावधानि

योग करने वालो को ये नियम जानना बहुत जरुरी है नहीं तो फायदे की जगह नुकसान हो जाएगा

• सुबह हो या शाम कभी भी खाने के तुरंत बाद योग नहीं करना चाहिए योग हमेशा खाने के 3 घंटे बाद करे क्युकी खाली पेट योग करने से फायदा है इसके लिए आप सुबह भी खाली पेट योग कर सकते है
केवल वज्रासन ही एसा योग है जिसे भोजन के तुरंत बाद किया जाता है
• योगासन की शुरुआत करते समय पहले हल्के आसन का चयन करे चाहे आपको कितना भी अभ्यास क्यों ना हो लेकिन योग की शुरुआत कठिन आसन से नहीं करनी चाहिए बिना शरीर को तयार किये अगर आप योग करने लगेंगे तो चोट लगने का डर रहेगा

• योग सूरज उगने से पहले या सूरज डूबने के बाद किसी भी समय किया जा सकता है लेकिन दिन के समय योग ना करे योगासन सुबह के समय करने से अधिक लाभ मिलता है लेकिन अगर आप सुबह ना कर पाए तो शाम या रात मैं खाना खाने से पहले कर सकते है( Yoga For Begginers )

• योग करते समय ठंडा पानी ना पिए
• योगासन करने के तुरंत बाद ना नहाये
• योग करते समय हसी मजाक का माहोल न बनाये क्युकी इससे आप योग नहीं कर पाएंगे
• योग करते समय कमजोर घुटने , कंधे आदि का ख़ास ख्याल रखे

• योग करते समय ढीले और आरामदायक कपडे ही पहने
• किसी भी योगासन को झटके से ना करे न ही योगासन की मुद्रा से झटके से बाहर निकले
• इसके अलावा आप योग उतना ही करे जितना आप कर पाए मतलब ना एकदम से अधिक योग करे ना एकदम कम

• 3 साल से कम उम्र के बच्चे योगासन ना करे
• 3 से 7 साल की उर के बच्चे हल्की योगासन करे
• 7 साल से अधिक उम्र के बच्चे हर तरह का योगासन कर सकते है

4. कब और कोनसी जगह

योगासन खुली और ताज़ी हवा में करना सबसे अच्छा माना गया है फिर भी अगर आप ना पाए तो किसी भी खाली जगह आप आसन कर सकते है योगासन मैदान , गार्डन , आँगन , बालकनी मैं करे या छत पर करे या अपने कमरे मैं भी कर सकते है जहाँ हवा आती हो( Yoga For Begginers )

योगासन करने लिय सबसे अच्छा समय सूर्योदय होता है लेकिन आप सुबह या शाम कभी भी योग कर सकते है या दोनों समय योग कर सकते है सुबह के समय योग करने से अधिक लाभ प्राप्त होता है

6. प्राणायाम

(A) अनुलोम विलोम

अनुलोम मतलब सीधा अतार्थ नाक का दाहिना छिद्र और विलोम मतलब उल्टा नाक का बाया छिद्र अतार्थ नाक के दाए छिद्र से सांस खीचते हुए नाक के बाए छिद्र से सांस को बाहर निकालना इसी तरह नाक के बाए छिद्र से सांस को खीचते हुए नाक के दाए छिद्र से सांस को बाहर निकालना |
इसे नाडी शोधक प्राणायाम भी कहते है

लाभ

फेफड़े शक्तिशाली होते है
ह्रदय बलवान होता है
गठिया के लिए फायदेमंद है
पाचनतंत्र को दुरस्त करता है
तनाव और चिंता को कम करता है
पुरे शरीर मैं शुद्ध ऑक्सीजन की आपूर्ति करता है
इस प्राणायाम को 5 से 15 मिनट टक कर सकते है

(B) कपालभाती

संस्कृत मैं कपाल का अर्थ होता है ललाट और भाती का अर्थ होता है तेज
इस प्राणायाम का निरंतर अभ्यास करने से चेहरे पर चमक आती है
इसे करने के लिए सबसे पहले आप रीढ़ की सीधा रखते हुए बैठे फिर तेजी से नाक के दोनों छिद्रों से सांस को बाहर फेकते हुए पेट को अन्दर की तरफ संकुचित करे इसी प्रकार बाद मैं सांस को अंदर लेते हुए पेट को बाहर की और संकुचित करे इसे शुरुआत मैं 50 बार ही करे बाद में धीरे धीरे आप इसे बढ़ा सकते है

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