आज हम बात करणमे जा रहे हे ! ब्रह्मचर्य की कठिनाइया और विघ्नं के बारे में ! गीता में लिखा हे ! विषय और इन्द्रिय सहयोग से जो सुख प्रथम अमृत के सम्मान सुखकर प्रतीत होते हे !वह परिणाम में विष के सम्मान घातक होजाते हे ! ये सभी सुख राजस सुख हे ! शरीर और इंद्री ही जीवन की मुख्य सम्पति हे ! अब यदि हमारी ऊँगली में यदि जरा सा कटा चूब जाय तो हमारी तमाम जीवन शक्ति विकल होकर उदार ही लग जाती हे !