ब्रह्म योग अन्य प्रकार के योगों के विपरीत है, जिनकी जड़ें वैदिक ज्योतिष और हिंदू में हैं। ब्रह्म योग का प्रभाव कई बाहरी और परस्पर कारकों पर निर्भर करता है, जो सीधे वैदिक ज्योतिष से प्रभावित हैं।

आप सभी के हिसाब से स्वप्रेम का मतलब क्या है ? आप सब क्या सोचते है इसके बारे मैं ?
तो शायद आप सब कहेंगे की स्वप्रेम …..

ये शब्द सुनने मैं बहुत आसन लगता है लेकिन जितना साधारण ये सुनने मैं लगता है उतना होता नहीं है क्युकी मौन की ताक़त सबसे बड़ी ताक़त होती है ….

“ विष पीकर शंकर महादेव हो गए और अमृत पीकर राहू केतु असुर ही रह गये ““कहते है जब भाग्य बुरा चल रहा हो तो हमे मीठी नदी का पानी भी खारा लगता है “